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भारत और सिंगापुर की सेनाओं ने तोपों से बरसाए गोले!

सिंगापुर-भारतीय सेना

झांसी। तेरह दिनों से जारी भारत और सिंगापुर की सेनाओं का संयुक्त युद्धाभ्यास आज खत्म हो जाएगा। शुक्रवार को युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं ने अपनी-अपनी तोपों से लक्ष्य पर निशाना साधते हुए गोले बरसाए। इससे बबीना छावनी की फील्ड फायरिंग रेंज युद्ध के मैदान में तब्दील नजर आई। दोनों सेनाओं ने अपने-अपने सैन्य कौशल को साझा किया।





युद्धाभ्यास

सिंगापुर की सेना का इंडियन आर्मी के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास

रेंज में 5 मार्च से सिंगापुर और भारतीय सेना का संयुक्त युद्धाभ्यास ‘एक्सरसाइज बोल्ड कुरुक्षेत्र-2017’ शुरू हुआ था, जिसमें दोनों देशों के ढाई-ढाई सौ जवान और ऑफिसर्स शामिल रहे। युद्धाभ्यास के लिए सिंगापुर की सेना अपने साथ तोप और अन्य हथियार लेकर आई है। अभ्यास के दौरान दोनों सेनाओं ने आपसी समझ और एक दूसरे के हथियारों के बारे में जानकारी हासिल की। साथ ही लक्ष्य पर निशाना साधते हुए उसे कुशलता से भेदने के तौर-तरीकों का भी आदान-प्रदान किया।

संयुक्त युद्धभ्यास

भारतीय सेना के साख सिंगापुर की सेना का युद्धभ्यास

संयुक्त युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाओं को भारतीय सेना के व्हाइट टाइगर डिविजन के कार्यवाहक जनरल ऑफिसर कमांडिंग और सिंगापुर सेना के ब्रिगेडियर जनरल अल्फ्रेड फॉक्स ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि संयुक्त युद्धाभ्यास से दोनों देशों की सैन्य क्षमता में बढ़ोत्तरी हुई है। आगे भी यह क्रम जारी रहेगा। इस दौरान दोनों अफसरों ने एक-दूसरे को अपनी सेनाओं के स्मृति चिह्न भेंट किए। युद्धाभ्यास में सिंगापुर आर्मी के रक्षा सलाहकार कर्नल लून तीयान युआन रिचर्ड, चीफ इंजीनियर ऑफिसर कर्नल ओंग योग लांग तथा ब्रिगेड कमांडर एसएलटीसी वू सिन बून शामिल रहे।

भारत-सिंगापुर की सेना

भारत-सिंगापुर की सेनाओं का युद्धाभ्यास

सिंगापुर आर्मी के साथ 11वीं बार संयुक्त युद्धाभ्यास:

इससे पहले भारत और सिंगापुर की सेनाओं के बीच 10 बार संयुक्त युद्धाभ्यास हो चुका है। साल 2003 में भारत और सिंगापुर के बीच हुए द्विपक्षीय समझौते के बाद से यह क्रम जारी है। इस समझौते में सैन्य सहयोग विस्तार, संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, सैन्य तकनीकी का विकास और समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाना शामिल था।

सिंगापुर आर्मी में भारतीय

युद्धाभ्यास के लिए पहुंची सिंगापुर आर्मी में कई जवान भारतीय मूल के नजर आए, इनमें महिलाएं भी शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि मुंबई से भी छोटे सिंगापुर की आबादी लगभग पचास लाख है। इस आबादी में 10 फीसदी हिस्सा भारतीय मूल के लोगों का है। कारोबार हो या सेना, सभी क्षेत्रों में भारतीय मूल के लोग सिंगापुर को अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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