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भारत-नेपाल सेना ने ऐसे पूरा किया आतंक विरोधी आपरेशन!

लखनऊ। उत्तराखण्ड के पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास सोमवार को संपन्न हो गया। भारतीय सेना के मध्य कमान के पंचशूल ब्रिगेड के तत्वावधान में आयोजित यह सैन्य युद्धाभ्यास विगत 07 मार्च 2017 से 20 मार्च 2017 तक आयोजित किया गया। 14 दिवसीय इस संयुक्त युद्धाभ्यास में नेपाली सेना की ओर से दुर्गा बक्श बटालियन की एक सैन्य टुकड़ी जबकि भारतीय सेना की ओर से पंजाब रेजिमेन्ट की एकता शक्ति बटालियन की एक सैन्य टुकड़ी ने इस युद्धाभ्यास में भाग लिया।





भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास

पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास

भारत-नेपाल सेना के इस 11वें संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास में दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियां एक दूसरे के सैन्य हथियारों एवं उपकरणों से परिचित हुई। इस दौरान दोनों देशों की सैन्य टुड़ियों ने सैन्य आपरेशन के दौरान सजग युद्ध कौशल का परिचय देते हुए परिस्थितियों के अनुरूप ड्रिल सामंजस्य, नाकाबंदी व खोज तथा ढूंढकर मार गिराने जैसे युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। इस अभ्यास के दौरान आपदा प्रबंधन के तहत राहत एवं बचाव कार्यों से जुड़ी विविध गतिविधियों के प्रति भी दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों ने अपने अनुभवों को साझा किया।

इस संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से दोनों देशों की सेनाओं को एक दूसरे को समझने एवं सीखने का यह एक बेहतर अवसर था। इसी परिप्रेक्ष्य में दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों ने ड्रिल व सतही युद्ध कला सहित पर्वतीय क्षेत्रों में लड़े जाने वाले जंगल युद्ध तथा आतंकवाद विरोधी सैन्य आपरेशनों से जुड़े अपने-अपने युद्ध कौशल एवं अनुभवों को एक दूसरे से साझा किया।

भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास

पिथौरागढ़ में भारत-नेपाल संयुक्त सैन्य युद्धाभ्यास के दौरान अफसर और जवान

संयुक्त युद्धाभ्यास के अंतिम 72 घंटों के अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों ने एक नकली गाँव पर आधारित एक आतंकवाद विरोधी आपरेशन को अंजाम दिया जिसमें नाकेबंदी एवं खोज सहित आपरेशन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाया गया। इस सैन्य प्रशिक्षण के दौरान नेपाल सेना की ओर से फार वेस्टर्न डिवीजन के जीओसी मेजर जनरल दीपक प्रसाद भारती तथा भारतीय सेना की ओर से उत्तर भारत एरिया के जीओसी ले. जनरल ललित कुमार पाण्डेय मौजूद थे।

इस युद्धाभ्यास के दौरान दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों के सैनिकों ने अन्य मैत्रीपूर्ण गतिविधियों में भी भाग लिया जिसमें बास्केटबाल एवं वालीबाल प्रतियोगिता, स्थानीय जगहों का भ्रमण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल था। युद्धाभ्यास के समापन पर एक ‘बड़ाखाना’ का भी आयोजन किया गया।

दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों द्वारा इस सफल युद्धाभ्यास की यादगार के रूप में सैन्य परंपराओं के अनुरूप एक दूसरे को ‘स्मृति चिन्ह’ भेंट किये गये। यह सफल युद्धाभ्यास न केवल दोनों सेनाओं के लिए युद्ध कौशल को बढ़ाने में कारगर सिद्ध होगा बल्कि दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में भी सहायक सिद्ध होगा।

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