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मेजर अविनाश के नक्शेकदम पर… पहले पत्नी, अब बेटा

नई दिल्ली: चार आतंकियों को मारकर शहीद हुए मेजर अविनाश सिंह भदौरिया के नक्शेकदम पर जैसे उनकी पत्नी चलीं, वैसा ही जज्बा उनके बेटे में भी है। पिता जब शहीद हुए तब वह सिर्फ दो साल का था लेकिन सेना में जाने का जज्बा शायद उसके खून में ही है। और उसके जज्बे को पोषित किया उसकी मां कैप्टन (रिटायर्ड) शालिनी सिंह ने, जिसने पति की शहादत के साल भर के भीतर ही फौजी वर्दी पहन ली थी।





कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से नवाजे गए मेजर अविनाश का बेटा ध्रुव राज सिंह भदौरिया भी अब नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) की प्रवेश परीक्षा की तैयारी में है। परीक्षा 23 अप्रैल 2017 यानि रविवार को है। हाल ही में ब्यूटी कांटेस्ट में एक खिताब हासिल करने की वजह से शालिनी सिंह का परिवार फिर से सुर्खियों में है। जिंदादिल पिता और जीवट मां के इस बेटे के सपने को जानकर उस घटना की याद आना स्वाभाविक है जो भदौरिया परिवार के लिए एक मायने में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण भी कही जा सकती है।

मां शालिनी सिंह और पिता अविनाश सिंह भदौरिया की गोद में ध्रुव।

मेजर अविनाश सिंह भदौरिया

17 साल पहले जब उनकी शहादत हुई तब उनके दोस्त अमित निगम (फाइटर पायलट) के कहे वाक्य याद आते हैं-‘बहुत तेज तर्रार और निर्भीक शख्स था। उसमें देश में आतंकवाद का खात्मा करने का गजब का जोश था।’ अमित निगम की अविनाश से मुलाकात खड़कवासला (पुणे) में आफिसर ट्रेनिंग के दौरान हुई थी। अविनाश के साथी याद करते हैं कि वह हर कोर्स में अव्वल आता था। कोर्स के दौरान अविनाश सिंह को बटालियन कैडेट कैप्टन का अवार्ड भी मिला। एक दोस्त से दीवाली पर घर आने का वादा किया था अविनाश ने लेकिन इससे पहले ही उसने जम्मू में रक्त से होली खेल ली। बस महीना भर पहले। 28 सितंबर 2001 को जम्मू में मेजर अविनाश सिंह का आतंकवादियों से पाला पड़ा। अविनाश आखिरी सांस तक लड़े और चार आतंकियों का काम तमाम कर डाला।

शहीद मेजर अविनाश सिंह के फेसबुक पेज पर जाने के लिए यहां क्लिक करें

अविनाश सिंह की शहादत के बाद बनाए गए फेसबुक खाते पर अब कोई गतविधि नहीं होती। उस पर लिखा है कि इस अमर शहीद का बचपन से ही सपना था ‘सेना में जाना’। कानपुर के गोविंद नगर में पैदा हुए अविनाश का ताल्लुक एक राजनीतिक परिवार से था। 14 दिसंबर 1971 को जन्मे अविनाश ने वहीं सेठ आनंद राम जयपुरिया स्कूल से दसवीं और फिर केंद्रीय विद्यालय से बारहवीं पास करके पीपीएन कालेज में दाखिला लिया। विषय चुना विज्ञान। लेकिन इस बीच NDA की परीक्षा भी दी।

मां कैप्टन शालिनी सिंह (रिटायर्ड) के साथ ध्रुव राज सिंह भदौरिया

1990 में NDA में चुने जाने के बाद 18 मद्रास में कमीशन प्राप्त किया। पहली तैनाती असम में उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र हाथीगढ़ में हुई। इसके बाद भारत पाकिस्तान सीमा पर कच्छ (गुजरात) में। फिर अविनाश को 8 राष्ट्रीय राइफल्स से डोडा भेज दिया गया। लेकिन इससे पहले अपने ही कॉलेज में पढ़ी शालिनी से विवाह बंधन में बंधे। वह 1997 था।

कैप्टन (रिटायर्ड) शालिनी सिंह ने अपने शेरदिल पति मेजर अविनाश सिंह भदौरिया की आदमकद फोटो फ्रेम करके लगा रखी है

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