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पोकरण रेंज में अमेरिकी तोप हॉवित्जर ने जमकर की फायरिंग !

एम-777हॉवित्जर

जैसलमेर। जिले की पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपों की मारक क्षमता का ट्रायल किया गया। प्रारंभ में दो अमेरिकी गन ट्रायल के लिए जैसलमेर के पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में लाई गई है।





ट्रायल में अमेरिकी सदस्यों की टीम के साथ ही इसके निर्माता बीएई सिस्टम के इंजीनियर इस अवसर पर उपस्थित थे। ट्रायल के लिए भारतीय सेना की एक आर्टिलरी यूनिट के एक दल ने लेफ्टिनेंट कर्नल सौरभ के नेतृत्व में 4.4 टन वजनी इस गन की डेवलपमेन्ट ऑफ़ फायरिंग टेबल का काम मंगलवार से शुरू कर दिया। मंगलवार को इस गन द्वारा नाइट में फायर किया गया तथा इस कड़ी में बुधवार को इनडायरेक्ट ऑफ़ फायर किया गया।

एम-777हॉवित्जर

हाल ही में अमेरिका के साथ 155 एम 777 अल्ट्रा हॉवित्जर लाइट गन खरीदने के हुए एमओयू के बाद इसके व्यापक परीक्षण की तैयारियां शुरू की जा चुकी थीं। इसके लिए गन टेबल बनाने व अलग-अलग एम्युनिशन ट्रायल किये गए। इसके अलावा अलग-अलग ऐंगल व अलग-अलग दूरियों पर इसे फायर कर इसकी मारक क्षमता को परखा गया।

गौरतलब है कि 38 साल के लंबे इंजतार के बाद एम-777 हॉवित्जर तोपों की पहली खेप भारतीय सेना को मिल चुकी है। इस तरह साल 1986 में बोफोर्स तोप के बाद अब सेना को कारगर तोप मिलने का रास्ता साफ हो गया।

इस गन की खासियत यह हैं कि ये 4.4 टन वजनी होने के कारण इसे उठाकर या फील्ड कर हेलिकाप्टर के जरिये या अन्य किसी साधनों से एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है तथा इसमें भारत निर्मित गोला बारूद का प्रयोग किया जा सकता है. स्वीडिश बोफोर्स तोपों के बाद भारतीय सेना में सम्मिलित होने के लम्बे अंतराल के बाद ये अमेरिकी शक्तिशाली गन भारतीय सेना की प्रहार क्षमता निश्चित रूप से मजबूत करेगी।

इस गन की डायरेक्ट मारक क्षमता 04 किलोमीटर तथा इनडायरेक्ट मारक क्षमता 30 से 40 किलोमीटर तक है। इस गन को भारत के किसी भी मौसम व परिस्थितयों और पहाड़ पत्थर, रेगिस्तान, मैदानी इलाकों, तथा जलीय क्षेत्रों में इसका उपयोग किया जा सकता है।

डील के अन्तर्गत कुल 145 गन की डिलीवरी 2021 तक होनी है इसमें 25 गन अमेरिका से आयात की जायेगी जबकि बाकी 120 गनों को भारत में ही बी.ए.ई. सिस्टम के तहत बिजनस पार्टनर महिन्द्रा कंपनी के सहयोग से असेम्बल कर डिलीवरी की जायेगी।

इस हॉवित्जर में क्या है खास

  • ये 155 एमएम की अत्यंत हल्की हॉवित्जर सेना के लिए बेहद अहम होगी
  • इसे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सकेगा
  • हल्का वजन होने के कारण हेलिकॉप्टर से पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकेगा
  • अरुणाचल में चीन से सटी सीमा पर सेना को इस तोप की खास रूप से जरूरत थी
  • आप्टिकल फायर कंट्रोल वाली यह तोप एक मिनट में 5 राउंड फायर करती है
  • 40 किलोमीटर दूरी स्थित टारगेट पर सटीक निशाना साधा जा सकता है
  • यह अकेली ऐसी तोप है जो 4200 किलो से कम वजन की है
  • ये ताप 25 किमी प्रति घंटा मूव कर सकती है
  • यह 52 कैलिबर राउंडस लेगी, जबकि बोफोर्स 39 कैलिबर है
  • ‘माउंटेन स्ट्राइक कोर’ के गठन के बाद इस तोप की ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही थी
  • जाहिर है सेना की आर्टिलरी के लिए ये तोप महत्वपूर्ण साबित होगी

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