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अमेरिका से भारत पहुंच गईं दो हॉवित्जर तोपें

एम-777हॉवित्जर

नई दिल्ली। बोफोर्स सौदे की कड़वी यादों को अगर भुला दिया जाए तो भारतीय सेना की ताकत अब और भी ज्यादा हो गई, क्योंकि अमेरिका की कम्पनी BAE सिस्टम्स से खरीदी गई एम-777 हॉवित्जर तोप भारतीय आर्टिलरी में शामिल होने जा रही है। अमेरिका से दो ‘अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर’ बुधवार को अमेरिका से भारत लार्इ गर्इं। इनको परीक्षण के लिए राजस्थान के पोखरण भेजा गया है, जहां आज (गुरुवार) इसका परीक्षण होना है। सूत्रों की मानें, तो इस साल सितंबर तक तीन अन्य अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर भारत लाई जाएंगी। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक इसके बाद मार्च 2019 से 2021 तक हर माह तीन-तीन हॉवित्जर भारत पहुंचाने की योजना है।





2900 करोड़ की इस डील के तहत 145 नई तोप का सौदा

बता दें कि 1986 में बोफोर्स तोप के बाद भारतीय सेना को एक कारगर तोप मिल सकेगी। इतने लंबे समय बाद अमेरिका-भारत के बीच 2900 करोड़ की इस डील के तहत 145 नई तोप का सौदा हुआ है, इस तोप का इस्तेमाल अमेरिका अफगानिस्तान में कर रहा है। आपको बता दें कि 2006 में भारत अमेरिका की इस खरीद पर बातचीत शुरू हुई थी। इसके बाद अगस्त 2013 में अमेरिका ने हॉवित्जर का नया वर्जन भारत को देने की पेशकश की थी, उस समय ये डील 885 मिलियन डॉलर में हो रही थी। इस तोप को आज सवेरे विशेष विमानों द्वारा दिल्ली लाया गया। पोखरण फायरिंग रेंज में अमेरिकी विशषज्ञ भारतीय सेना को इसका डेमो देंगे, साथ ही सेना के जवानों को इसे आॅपरेट करने का प्रशिक्षण भी देंगे। ट्रायल के बाद तोप की पहली खेप पाकिस्तान से बढ़ते तनाव के कारण कश्मीर में तैनात की जाएगी।

एम-777हॉवित्जर

इस हॉवित्जर में क्या है खास

ये 155 एमएम की अत्यंत हल्की हॉवित्जर सेना के लिए बेहद अहम होगी, क्योंकि इसे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से ले जाया जा सकेगा। हल्का वजन होने के कारण हेलिकॉप्टर से पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचाया जा सकेगा। साथ ही अरुणाचल में चीन से सटी सीमा पर सेना को इस तोप की खास रूप से जरूरत थी, जहां इसे तैनात करने की बात कही जा रही है। आॅप्टिकल फायर कंट्रोल वाली यह तोप एक मिनट में 5 राउंड फायर करती है तथा 40 किलोमीटर दूरी स्थित टारगेट पर सटीक निशाना साधा जा सकता है। यह अकेली ऐसी तोप है जो 4200 किलो से कम वजन की है। ये ताप 25 किमी प्रति घंटा मूव कर सकती है। यह 52 कैलिबर राउंडस लेगी, जबकि बोफर्स 39 कैलिबर है। ‘माउंटेन स्ट्राइक कोर’ के गठन के बाद इस तोप की ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही थी। जाहिर है सेना की आर्टिलरी के लिए ये तोप महत्वपूर्ण साबित होगी।

 ये कंपनी ‘मेक इन इंडिया’ प्रोजेक्ट के तहत भारत में करेगी निर्माण

कई साल से इस तोप की कीमत पर बात अटकी थी, वहीं आॅर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड ने देश में ही 155 एमएम की तोप बनाने की कोशिश की थी जिनके ट्रायल के दौरान गन बैरल फट जाने की घटनाएं सामने आर्इं थी। गौरतलब है कि भारत ने अपने आर्टिलरी निर्माण को अपग्रेड करने के लिए बड़ी योजना बनाई है, जिसमें 22,000 करोड़ के मॉडर्नाइजेशन प्लान के तहत पांच अलग अलग तरह की आर्टिलरी गन अर्जित करने की प्रक्रिया में हैं। कुल 145 गन की इस डील के तहत पहले चरण में अमेरिकी कंपनी 25 तोपें बनाकर भारत भेजेगी, जबकि अन्य 120 तोप का निर्माण कंपनी भारत में महिंद्रा के सहयोग से मिलकर करेगी।

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