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बेफिक्र रहें… कैंटीन वाली शराब को प्रभावित नहीं करेगा GST

नई दिल्ली। कैंटीन स्टोर डिपार्टमेंट (सीएसडी) के माध्यम से बेची जाने वाली शराब पर गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स (GST) का कोई असर नहीं पड़ने वाला है। सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों को अथवा अधिकारियों को कैंटीन के माध्यम से मिलने वाली सस्ती शराब की सुविधा जीएसटी लागू होने के बाद भी मौजूदा दरों पर मिलती रहेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल ने सीएसडी कैंटीन से मिलने वाले सामान पर जीएसटी में 50 प्रतिशत की छूट देने का फैसला किया है।





मौजूदा दर पर ही मिलेगी यूआरसी शराब

जीएसटी राज्यों के क्रियान्वयन पर सेना मुख्यालय द्वारा 16 जून को जारी एक बयान में कहा गया, “जैसा कि शराब जीएसटी के दायरे से बाहर है, यूनिट रन कैंटीन (यूआरसी) शराब की बिक्री के लिए मौजूदा दर प्रणाली पर ही मिलती रहेगी।” सीएसडी के माध्यम से बेचे जाने वाली शराब पर टैक्स और स्थानीय कर संबंधित राज्य की उत्पाद शुल्क नीति पर निर्भर करता है, जिसमें सीएसडी आउटलेट स्थित है। टैक्स रियायत राज्य सरकारों का विशेषाधिकार है और सीएसडी की शराब की कीमत राज्यों के हिसाब से अलग-अलग है।

सीएसडी डिपो को जीएसटी में 50 प्रतिशत छूट

सीएसडी डिपो को कॉमर्शियल कंपनियों और विक्रेताओं द्वारा की गई आपूर्ति के लिए जीएसटी पर केंद्र सरकार ने 50 प्रतिशत छूट दी है। डिपो द्वारा थोक खरीद के समय जीएसटी लागू होगा, यूआरसी को माल की बिक्री के अंत में ग्राहकों पर जीएसटी लगाने की आवश्यकता नहीं होगी और इसके परिणामस्वरूप, यूआरसी को मासिक रिटर्न दाखिल करने या जीएसटी के लिए पंजीकरण कराने की छूट दी गई है।

1जुलाई के बाद खरीदे सामान पर लागू हो सकती हैं संशोधित दरों

सीएसडी के पास देश भर में 33 डिपो हैं, जो 3,500 से अधिक यूनिट रन कैंटीन (यूआरसी) रक्षा सेवा के साथ सह-स्थित हैं, इनमें से कई दूर-दराज के इलाकों में हैं। इन्हें कल्याणकारी साधन के रूप में स्थापित किया गया है, ये सुरक्षा कर्मियों को दैनिक जरुरत, सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू सामान, उपभोक्ता वस्तुओं और वाहनों जैसी कई तरह की वस्तुएं बेचते हैं। सूत्रों के मुताबिक, सीएसडी आउटलेट्स अपने पुराने स्टॉक को 30 जून, 2017 तक पुरानी दरों पर ही बेचेंगे। 1 जुलाई 2017 के बाद भी स्टॉक पुरानी दरों पर बेचा जाएगा, केवल 1 जुलाई के बाद सीएसडी द्वारा खरीदा जाने वाला स्टॉक संशोधित दरों पर बिकेगा। वहीं, दूसरी तरफ जीएसटी परिवेश में बिलिंग प्रक्रिया के लिए भी एक नया सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।

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