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ओआरओपी न लागू होने से मोदी सरकार से खफा पूर्व सैनिक चुनावों में कांग्रेस के साथ!

इस वर्ष पांच राज्यों में होनेवाले विधानसभा चुनाव में पूर्व सैनिक कांग्रेस का साथ देंगे। दरअसल, पूर्व सैनिक ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना लागू न किए जाने के चलते मोदी सरकार से खफा हैं और इसलिए वह विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का साथ देंगे। इस वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा में चुनाव होने हैं।

नई दिल्ली: इस वर्ष पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में पूर्व सैनिक कांग्रेस का साथ देंगे। दरअसल, पूर्व सैनिक वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना लागू न किए जाने के चलते मोदी सरकार से खफा हैं और इसलिए वह विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का साथ देंगे। इस वर्ष उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, गोवा में चुनाव होने हैं।





OROP पर केंद्र सरकार पर आक्रामक रुख अपनाने की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मेहनत एक प्रकार से रंग लाती दिख रही है। खबरों के मुताबिक, पूर्व सैनिक आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को समर्थन कर सकते है। 

संभवत: कांग्रेस इसका ऐलान 5 जनवरी यानि गुरूवार को प्रेस कांफ्रेंस में कर सकती है। प्रेस कांफ्रेंस में उत्तराखंड के सीएम हरीश रावत, हिमाचल प्रदेश के सीएम वीरभद्र सिंह और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पूर्व सैनिकों के साथ शामिल हो सकते हैं।

देश में 25 लाख से भी ज्यादा पूर्व सैनिक है, कांग्रेस का मानना है की पहाड़ी प्रदेशों में और पंजाब में पूर्व सैनिकों की एक बड़ी तादाद है और इस तरह से कांग्रेस को समर्थन मिलने से चुनाव में उसको खासा फायदा होगा।

राहुल गांधी ने मोदी सरकार को जमकर घेरा OROP के मुद्दे पर

  • कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ओरआरओपी के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेर चुके है
  • पीएम मोदी को इस बाबत चिट्ठी भी लिख चुके है
  • राहुल गांधी ने पूर्व सैनिक रामकृष्ण ग्रेवाल की आत्महत्या पर सड़क पर हंगामा भी किया था

रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह की अगुवाई में पूर्व सैनिकों का एक दल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से 4 नवंबर को मिल चुका है। वहीं, ओआरओपी के लिए संघर्ष कर रहे दल के सदस्य रिटायर्ड कर्नल रोहित चौधरी ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव जीतने के लिए बीजेपी ने OROP मुद्दे का जमकर इस्तेमाल किया था। हमें मोदी सरकार से काफी उम्मीदें थी जो अब फेल हो गई हैं। विकलांगों के पेंशन में कमी कर दी गई है, OROP को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है, मिलिट्री की जगह पैरा मिलिट्री को ज्यादा तरजीह दी जा रही है, सर्जिकल स्ट्राइक को राजनीति के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

कर्नल चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार की पूर्व सैनिकों के प्रति बेरुखी को देखते हुए हमने आगामी विधानसभा चुनाव में काग्रेस का साथ देने का निर्णय लिया है। कांग्रेस बीजेपी की अपेक्षा सही विकल्प है।

गौरतलब है कि 14 जून 2015 से पूर्व सैनिकों का संघ जंतर मंतर पर OROP लागू करने के लिए धरना दे रहा है लेकिन मोदी सरकार द्वारा उनसे किसी प्रकार की बात-चीत नहीं की गई। पीएम मोदी 16वीं लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जमकर OROP मुद्दे का इस्तेमाल करते थे। उन्होंने हरियाणा में एक पूर्व सैनिकों के साथ बहुत ही बड़ी जनसभा भी की थी लेकिन सत्ता में आने के बाद वो OROP लागू करने में विफल रहे। पूर्व सैनिक इससे दुखी हैं और यही कारण है कि वह कांग्रेस का साथ आगामी विधानसभा चुनावों में देंगे।

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