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ले. जनरल रैंक पर तरक्की की नई नीति 4 माह में बने : AFT

आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल
  • सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के रैंक पर तरक्की दिए जाने की मौजूदा नीति को बेहद पक्षपातपूर्ण और तर्कविहीन करार देते हुए आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) ने नीति की समीक्षा कर नई नीति चार महीने में तैयार करने के आदेश दिए हैं।

जस्टिस वी. के. शाली और लेफ्टिनेंट जनरल एस.के. सिंह की दिल्ली स्थित ट्रिब्यूनल की प्रमुख खंडपीठ ने इससे सम्बंधित आदेश रक्षा मंत्रालय को देते हुए कहा है कि मौजूदा नीति भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत मिले समानता के अधिकार का उल्लंघन है। इसकी वजह से मेजर जनरल रैंक के कई अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल के ओहदे तक की तरक्की पाने से महरूम रह जाते हैं। इतना ही नहीं, इससे सेना के अधिकारियों की श्रेणी में एक नई श्रेणी और बन जाती है।





  • वर्तमान नीति से तरक्की से वंचित रह गए मेजर जनरल रैंक के अफसर

AFT खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि 16 साल के अंतराल के बाद 2009 में, सेना के नजरिए पर विचार किए बिना, लाई गई इस नीति से 55 अतिरिक्त पदों (39 से 94) पर मेजर जनरल रैंक के अफसरों की तरक्की के लिए रास्ता नहीं खुल सका। इससे एक ही श्रेणी के लिए अधिकारियों को तरक्की मिली।

AFT ने ये आदेश दिसम्बर 1978 बैच के इनफेंटरी अधिकारी मेजर जनरल के. ए. मुथन्ना की तरफ से दायर याचिका पर दिया। आदेश में कहा गया है कि ‘दो स्ट्रीम’ वाली नीति की समीक्षा और नई नीति के पालन की प्रक्रिया तेजी से और प्राथमिकता के तौर पर की जाए। असल में अक्टूबर 2017 में स्पेशल सलेक्शन बोर्ड को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक पर तरक्की देने के लिए अफसरों का चयन करना है।

मौजूदा नीति में ‘कमांड और स्टाफ’ दो श्रेणियों के आधार पर बांटकर मेजर जनरल को लेफ्टिनेंट जनरल रैंक पर तरक्की दी जाती है। रक्षा मंत्रालय का तर्क है कि जिस मेजर जनरल (स्टाफ) ने कमांड तैनाती न की हो उसे लेफ्टिनेंट जनरल बनाना इस ओहदे के उन मानकों का स्तर घटाना है जो भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल रैंक के लिए तय है।

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