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चीन बार्डर पर सेना का काम हो गया आसान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

तिनसुकिया। चीन सीमा के नजदीक ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर बने देश के सबसे लंबे ढोला-सादिया पुल को आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को समर्पित कर दिया। प्रधानमंत्री ने इस पुल का नाम भूपेन हजारिका के नाम पर रखने की घोषणा की। तीन लेन वाले इस पुल के खुल जाने से असम और अरुणाचल प्रदेश आपस में जुड़ गया। 9.15 किलोमीटर लंबे पुल के चलते असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच सफर में चार घंटे का समय कम लगेगा।





दूसरी तरफ, चीन से आए दिन चुनौतियों के मद्देनजर यह पुल भारत की सामरिक और रणनीतिक जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होगा। अब चीन सीमा से सटी भारतीय चौकियों तक सेना के वाहनों की पहुँच कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी। इस पुल के बन जाने से सीमा व्यापार बेहतर होने के साथ औद्योगिक निवेश में वृद्धि होगी। बीजेपी सरकार ने 24 मई को असम में अपना एक वर्ष पूरा किया है। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा, ‘असम और अरुणाचल प्रदेश का देश के लिए अत्यंत सामरिक महत्व है। पुल चीन के साथ हमारी सीमा के करीब है लिहाजा टकराव के समय यह सैनिकों और तोपों की शीघ्रता से आवाजाही में मदद करेगा।’

युद्धक टैंकों की आवाजाही होगी आसान

ये पुल पूर्वोत्तर के दो राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम को एक दूसरे के साथ जोड़ेगा, ये पुल खास तौर पर युद्धक टैंकों की आवाजाही की सुविधा को आसान बनाने के लिए भी निर्मित किया गया है। पुल पर तीन लेन कैरिज रास्ता है। यह अरुणाचल के सीमावर्ती इलाकों में देश की रणनीतिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा। राज्य में आने वाली कई जल व विद्युत परियोजनाओं को भी सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा। पुल में 60 टन भार सहने की क्षमता है जिस पर भारी युद्धक टैंक भी आसानी से आ जा सकते हैं।

सुरक्षा-दृष्टि से पुल को अत्यंत महत्वपूर्ण समझा जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुल का दौरा किया और पुल पर कुछ दूर पैदल चले।

दरअसल, सादिया मशहूर गायक भूपेन हजारिका का जन्मस्थान भी है। पुल असम की राजधानी दिसपुर से 540 किलोमीटर दूर और अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर से 300 किलोमीटर की दूरी पर है। चीन सीमा से इसकी हवाई दूरी 100 किलोमीटर है। इस पुल के बन जाने से 165 किमी की दूरी यानि चार से पांच घंटे के समय की बचत होगी, जिसके चलते विकास की रफ्तार तेजी होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि सादिया का अदरक उच्च कोटि का है। इस पुल के बन जाने से किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी। प्रधानमंत्री ने किसानों से आर्गेनिक अदर की खेती करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह पुल दोनों राज्यों के विकास की कड़ी साबित होगा।

अरूणाचल को अपना क्षेत्र कहता है चीन

आपको बता दें कि ये पुल चीन की सीमा पर दक्षिण अरूणाचल प्रदेश के वालॉग किबिथु सेक्टर में भारतीय सैनिकों की मदद करेगा। ये सेक्टर 1962 में हुए युद्ध में उत्तर पश्चिम में चीन द्वारा घेर लिया गया था। चीन का दावा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका क्षेत्र है और उसे वो दक्षिणी तिब्बत कहता है। चीन ने हाल ही में बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश की यात्रा का भी कड़ा विरोध किया था।

क्या है इस महासेतु की खासियत

  • ब्रह्मपुत्र नदी पर बना 9.15 किलो मीटर लंबा ये पुल एशिया का दूसरा सबसे लंबा पुल है।
  • पुल का निर्माण 2011 में शुरू हुआ था। ये पुल 6 साल में बनकर तैयार हुआ।
  • पुल के निर्माण पर 950 करोड़ रुपए की लागत आई।
  • पुल के बुनियादी ढांचे पर मजबूती से काम किया गया है और 182 खम्भों पर टिका है।
  • असम में तिनसुकिया जिले के ढोला व सादिया को जोड़ता है।
  • मुंबई के बांद्रा वर्ली सी लिंक पुल से 3.55 किलोमीटर लंबा है।
  • यह पुल देश की सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए सामरिक रूप से अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
  • पूर्वी क्षेत्र के दूर दराज के लोगों को देश के अन्य हिस्सों से जुड़ने की सुविधा देगा। इससे पहले ये लोग नौकायन के जरिए अन्य स्थानों से जुड़ते थे।
  • इस पुल की सहायता से भारतीय सेना की पहुँच चीन सीमा तक आसान हो जाएगी।
  • आम जनता को कारोबार व व्यापार की सुविधा भी देगा ये पुल।
  • उत्तर पूर्व में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की मुख्य परियोजना थी तथा इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) में बनाया गया है।
  • तेजपुर के करीब कलाईभोमोरा पुल के बाद ब्रह्मपुत्र पर आगे 375 किमी ढोला तक बीच में कोई पुल नहीं है।
  • पुल के जरिए चीन सीमा तक के सफर में 4 घंटे की होगी कटौती।
  • तकरीबन 60 टन के बैटल टैंक भी इस पुल पर से गुजर सकेंगे।
  • पुल को पूरी तरह भूकंप विरोधी तकनीक से बनाया गया है।
  • पुल का निर्माण इंडो-सिनो बॉर्डर पर सैन्य जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया है।

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