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‘करगिल वार के पीछे चीन का भी हाथ था’

जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने हाल में इशारा किया था कि कश्मीर के मामलों में चीन की दखलंदाजी भी है। भारत सरकार भी प्रकारांतर से ऐसे संकेत दे रही है। अब भारतीय मीडिया की एक रिपोर्ट से यह बात सामने आई है कि सन 1999 के करगिल युद्ध के एक साल पहले 1998 में उस इलाके में पाकिस्तानी सैनिकों के साथ चीनी सैनिक भी जमा थे। यह जानकारी भारतीय सेना की 121-इनफेंट्री ब्रिगेड के तत्कालीन कमांडर ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह ने अपने उच्चाधिकारियों को दी थी।





ब्रिगेडियर सिंह को कर दिया था बर्खास्त

ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह को करगिल युद्ध के बाद गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने के आरोप में सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह ने एरिया के तत्कालीन जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) के पास 25 अगस्त 1998 को भेजी अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी थी। यह रिपोर्ट अब चंडीगढ़ के सशस्त्र सेना न्यायाधिकरण (एएफटी) के पास है, जहाँ ब्रिगेडियर सिंह की याचिका पर सुनवाई हो रही है। करगिल युद्ध मई 1999 से 26 जुलाई 1999 तक चला था।

उस वक्त चीनी सैनिकों की मौजूदगी को नकार दिया था

बहरहाल उस वक्त सैनिक अधिकारियों ने ब्रिगेडियर सिंह की बात को नामंजूर कर दिया था। उन्होंने कहा, हम पहली बार सुन रहे हैं कि करगिल युद्ध में चीनी सैनिकों का हाथ भी हो सकता है। सेना की पश्चिमी कमान के पूर्व अध्यक्ष लेफ्टिनेंट केजे सिंह ने कहा, ‘इस मामले में चीनी भागीदारी संभव नहीं है। पाकिस्तान कोई लड़ाई शुरू करेगा तो चीन फौरन उसमें शामिल नहीं होगा। हाँ, चीन ने कभी मोर्चा खोला तो पाकिस्तान जरूर उसका फायदा उठाना चाहेगा।’

चीनी सैनिक लाए थे हॉवित्जर तोपें

एक और सेवा निवृत्त जनरल ने कहा कि उस लड़ाई के दौरान चीनी पूरी तरह तटस्थ रहे। ब्रिगेडियर सुरिंदर सिंह की रिपोर्ट में, जिसकी कॉपी अख़बार ने अपने पास होने का दावा किया है, करगिल इलाके की टोह लेने के बाद तैयार की गई थी। इसमें कहा गया था कि इस सेक्टर में चीनी सैनिकों द्वारा संचालित 155 मिमी की एम198 हॉवित्जर तोपें लाई गईं। तत्कालीन ब्रिगेड मेजर आरके द्विवेदी द्वारा तैयार किए गए उस दस्तावेज का शीर्षक था ‘बढ़ता खतरा (एनहांस्ड थ्रैट पर्सेप्शन)।’ यह रिपोर्ट तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल वीपी मलिक के सामने पेश करने का विचार था, जो उस इलाके में आने वाले थे।

सेना को किया गया था सावधान !

करगिल-युद्ध

करगिल युद्ध के वक्त तोप से गोले दागती भारतीय सेनाएं (फाइल फोटो)

इस नोट में युद्ध के नौ महीने पहले करगिल इलाके में पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्र में असाधारण गतिविधियाँ होने का उल्लेख किया गया था। इसमें सेना को इस बात से सावधान भी किया गया था कि घुसपैठियों को हथियारबंद किया जा रहा है और नए बंकर बनाए जा रहे हैं। दस्तावेज में यह भी कहा गया था कि इस अलर्ट के बाद एरिया के जीओसी ने इस इलाके में युद्धाभ्यास करने का आदेश दिया और स्थिति का पता लगाने के लिए एक अभ्यास किया गया, जिसका कोड नाम था ‘जाँच।’

हमले की जानकारी की अनदेखी की गई

इस अभ्यास के बाद ब्रिगेडियर ने एक रिपोर्ट तैयार की जिसमें कहा गया कि दुश्मन द्रास के इलाके में ब्रिगेड से भी ज्यादा बड़े आकार में फौज तैनात करने जा रहा है। इसमें यह निवेदन भी किया गया था कि बढ़ते खतरे को देखते हुए और ज्यादा सामग्री, भंडार और गोला-बारूद भेजा जाए।

ब्रिगेडियर सिंह ने अख़बार को बताया कि सौभाग्य से सारी चीजें रिकॉर्ड में उपलब्ध हैं, जिनसे पता लगता है कि मैंने संभावित हमले की पूरी जानकारी दे दी थी। दुर्भाग्य से हरेक जानकारी की अनदेखी की गई। हालांकि उन्हें बगैर कोर्ट मार्शल के बर्खास्त किया गया और पेंशन सुविधा दी गई, पर वे 2001 से अपना केस लड़ रहे हैं ताकि उनका सम्मान वापस हो।

ब्रिगेडियर सिंह का दावा है कि करगिल युद्ध के दौरान पाक अधिकृत कश्मीर में करगिल के पास चीन ने के2 गन पोजीशन में भारी तोपखाना तैनात किया था और उसे चलाने वाले फौजी लगाए थे। मैंने चीनी तोप-गोलों के फ्यूज जमा किए थे और अपने सीनियरों के पास भेजे थे।

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