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जनरल रावत की पत्थरबाजों को चुनौती, कश्मीर और पाकिस्तान पर 7 खास बातें कहीं

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नई दिल्ली। सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कश्मीर में सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाने वालों को चुनौती दी है और उन्होंने मेजर नितिन लितुल गोगोई के उस तरीके का एक तरह से समर्थन किया है जिसमें एक शख्स को जीप पर बांध के ढाल के तौर पर इस्तेमाल किया गया था।





जनरल रावत ने समाचार एजेंसी पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू में ऐसे कई विषयों पर चर्चा की और अपना नजरिया रखा जिसके लेकर वो कुछ समय से खामोश थे।

इंटरव्यू में जनरल बिपिन रावत की कहीं मुख्य बातें: 

  • लोग हमपर पत्थर बरसा रहे हों और पेट्रोल बम फेंक रहे हों, मैं अपने जवानों से केवल प्रतीक्षा करने और मरने के लिए नहीं कह सकता।
  • कश्मीरी युवक को जीप पर बांध मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने की घटना का बचाव किया, उन्होंने कहा कि कश्मीर में छद्म युद्ध (Proxy War) से निपटने के लिए सैनिकों को नए तौर-तरीके आजमाने पड़ते हैं। लोग हम पर पथराव कर रहे हैं, पेट्रोल बम फेंक रहे हैं, ऐसे में जब मेरे कर्मी मुझसे पूछते हैं कि हम क्या करें, तो क्या मुझे यह कहना चाहिए कि बस इंतजार करिए और जान दे दीजिए…? मैं राष्ट्रीय ध्वज के साथ एक अच्छा ताबूत लेकर आऊंगा और सम्मान के साथ शव को आपके घर भेजूंगा ? सेना प्रमुख के तौर पर क्या मुझे यह कहना चाहिए ? मुझे वहां तैनात जवानों का मनोबल बढ़ाए रखना है।

    पत्थरबाज

    कश्मीर में पत्थरबाज आए दिन सुरक्षाकर्मियों पर हमला करते हैं (फाइल फोटो)

  • किसी भी देश में लोगों में सेना का भय खत्म होने पर देश का विनाश हो जाता है। उन्होंने कहा कि विरोधियों को आपसे डरना चाहिए और आपके लोगों में भी आपका खौफ होना चाहिए। जब कानून-व्यवस्था से जुड़ा हुआ मसला हो तो अपने लोगों में भी सुरक्षा बलों का भय होना चाहिए।
  • घाटी के हालात से निपटने के लिए ज्यादा से ज्यादा सब्र से काम लिया जाता है। सेना प्रमुख के रूप में सेना का मनोबल मेरे लिए सबसे जरूरी है।
  • दक्षिण कश्मीर के चार जिले ही अशांत हैं और यह कहना गलत है कि पूरे कश्मीर में स्थिति नियंत्रण से बाहर चली गई है। कश्मीर मुद्दे के समाधान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इसके ठोस समाधान की जरूरत है। हर किसी को शामिल होने की जरूरत है। सेना की भूमिका यह तय करना है कि खू-खराबा ना हो और इसमें हिस्सा नहीं लेने वाले आम लोगों की रक्षा की जाए।
  • कश्मीरी लोगों से संपर्क के लिए राजनीतिक पहल के बारे में पूछे जाने पर जनरल रावत ने कहा कि यह सरकार को तय करना है। पूर्व में भी ऐसी पहल की जा चुकी है।
  • पाकिस्तान के संदर्भ में आर्मी चीफ ने कहा कि वह पाकिस्तान के साथ सीमित युद्ध का पूर्वानुमान नहीं प्रकट कर रहे हैं।

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