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जन्मदिन विशेष: 1971 भारत-पाक युद्ध के हीरो फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ से जुड़े 6 खास बातें

आज ही के दिन साल 1914 में पंजाब के अमृतसर के एक पारसी परिवार में  सैम मानेकशॉ का जन्म हुआ था।  सैम होरमूज़जी फ़्रामजी जमशेदजी मानेकशॉ यही था उनका पूरा नाम। लेकिन शायद ही कभी उन्हें इस नाम से पुकारा गया हो। वह प्रसिद्ध हुए तो सैम मानेकशॉ के रूप में। सैम मानेकशॉ अपने मजाकिया अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। अपने चालीस साल के फौजी जीवन में सैम ने पांच युद्धों में हिस्सा लिया, जिसमें दूसरा विश्वयुद्ध भी शामिल है। उनसे जुड़े कुछ ख़ास किस्से आज हम आपको बता रहे हैं।





अमृतसर में जन्मे सैम मानेकशॉ बनना चाहते थे डॉक्टर

सिखों की आस्था का महत्वपूर्ण स्थान अमृतसर। बहुत ही कम लोग जानते हैं कि सेना के भारतीय फील्ड मार्शल का खिताब पाने वाले सैम मानेकशॉ के पिता होर्मूसजी मानेकशॉ सैम को भी डॉक्टर बनाना चाहते थे क्योंकि वह खुद भी ब्रिटिश सेना में डॉक्टर थे।

पंजाब के बाद नैनीताल के शेरवुड कॉलेज में पढ़ाई पूरी करने के बाद, महज 15 साल की उम्र में सैम ने लंदन जाकर स्त्री रोग विशेषज्ञ बनने की इच्छा जाहिर की लेकिन छोटी उम्र का हवाला देकर उन्हें मना कर दिया गया। इस बात पर गुस्से में आकर सैम ने IMA की परीक्षा दी और इसमें उनका चुनाव भी हो गया। 15 उम्मीदवारों में उनका छठा नंबर रहा। सैम की तैनाती गोरखा रेजिमेंट में हो गई। पहली फरवरी ,1935 को वह सेकंड लेफ्टिनेंट बने लेकिन उनकी वरिष्ठता एक साल पहले यानी 4 फरवरी, 1934 तय की गई।

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