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कश्मीर में सेना 15 साल बाद लाई ‘CASO’

सीमा-पर-तनाव

श्रीनगर। राजपूताना रायफल्स में 2016 में कमीशन प्राप्त लेफ्टीनेंट उमर फैयाज को अगवा कर आतंकवादियों द्वारा गोलियों से छलनी किए जाने के बाद सेना ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। घाटी में तेजी से फैल रहे आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए आर्मी ने अब 15 सालों बाद कॉर्डन एन्ड सर्च ऑपरेशन्स (CASO-कासो) लागू करने का निर्णय लिया है। CASO का मतलब ‘घेरा डालना और तलाशी अभियान’ है जिसमें सेना खुफिया इनपुट्स के आधार पर ऑपरेशन चलाती है।





ऑपरेशन-कासो

घाटी में फैले आतंक की कमर तोड़ने के लिए सेना तैयार (फाइल फोटो)

सूत्रों के मुताबिक, कासो आतंक प्रभावित इलाकों जैसे दक्षिण कश्मीर के कुलगाम, पुलवामा, त्राल, बडगाम और शोपियां में काम करेगी। बता दें कि पहले 2001 में कासो को स्थानीय लोगों के कड़े विरोध के बाद बंद कर दिया गया था।

उल्लेखनीय है कि सन 2001 में कासो द्वारा किए जा रहे सर्च ऑपरेशन में स्थानीय लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा था। लेकिन अब समय की मांग तथा घाटी में आतंकी घटनाओं में बढ़ोतरी को देखते हुए ‘कासो’ को दोबारा सेना में लिया गया है।

घाटी में हिंसक प्रर्दशनों के चलते सुरक्षा के किए गए कडे़ इंतजाम

कश्मीर घाटी में शुक्रवार को हिंसक प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, शोपियां और बारामुला जिले में सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं। इसके अलावा ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में भी भारी सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है। श्रीनगर के नौहट्टा, रैनावारी, खान्यार, बटमालू समेत कई अन्य इलाकों में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों को तैनात किया है।

उल्लेखनीय है कि कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों में गुरुवार को प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुई। इसलिए आज पहले ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए ताकि झड़पें होने पर उन्हें आसानी से नियंत्रित किया जा सके।

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