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76वां आर्मर डे : लेफ्टीनेंट तारापोर ने अकेले ही उड़ा दिए थे पाकिस्तान के 60 टैंक

भारतीय सेना की आर्मर्ड कॉर्प

भारतीय सेना की आर्मर्ड कॉर्प (बख़्तरबंद कोर) ने सोमवार को अपना 76 वां आर्मर डे मनाया। यह दिन भारतीय कैवलरी रेजिमेंट के मशीनीकरण की याद दिलाता है। 1 मई 1938 को शिंदे हार्स को ऐसी पहली रेजीमेंट बनने का गौरव हासिल हुआ जिसने घोड़ों से मुक्ति पाई और टैंक से लैस हुई। उसे मिले विकर्स लाइट टैंक और शेवरले बख़्तरबंद कारें।





आर्मर्ड कॉर्प ने 1943 में अमेरिकी मूल के और अत्याधुनिक शेरमेन टैंक (एम 4) को अपने यहाँ शामिल किया था और बर्मा की मुक्ति के लिए जिस 14वीं आर्मी के नेतृत्व में जापान की सेना को खदेड़ने का काम किया गया था उसमें भी यह शामिल थी। आजादी के बाद, इस रेजीमेंट की एक तिहाई यूनिटें और ट्रेनिंग सेंटर पाकिस्तान में चले गए जबकि भारत में बच गईं 12 रेजिमेंट। इन रेजिमेंट ने बाद में कॉर्प को विकसित और विस्तारित किया।

आजादी के बाद आर्मर्ड कॉर्प में सेंचुरियंस मार्क VII और एएमएक्स -13 लाइट टैंकों को शामिल किया गया। …और तब से, आर्मर्ड कॉर्प स्वदेशी विजयंत टैंक, रूसी टी -54 और टी -55, टी -72 और टी -90 टैंक और अर्जुन मुख्य बैटल टैंक (एमबीटी) का संचालन कर रहा है।

कॉर्प ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी ताकत दिखाई थी। तब पंजाब में खेमकरन के निकट भारत के सेंचुरियन टैंकों ने पाकिस्तान के काफी परिष्कृत पैटन टैंकों को नेस्तनाबूत कर दिया था।

चाविंडा की लड़ाई में सियालकोट सेक्टर में फिलोरा में दिखाई बहादुरी के लिए पूना हार्स के लेफ्टीनेंट कर्नल अर्दशिर बुर्जोरजी तारापोर को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उन्होंने पाकिस्तान के 60 टैंक अकेले ही उड़ा दिए थे। परमवीर चक्र युद्ध के समय में भारत का सर्वोच्च शौर्य सम्मान है।

लेफ्टीनेंट कर्नल अर्दशिर बुर्जोरजी तारापोर

पूना हार्स के लेफ्टीनेंट कर्नल अर्दशिर बुर्जोरजी तारापोर ने पाकिस्तान के 60 टैंक अकेले ही उड़ा दिए थे।

आर्मर्ड कॉर्प ने पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में फिर से अपना शौर्य साबित किया। इस युद्ध में कॉर्प के टैंकों ने पश्चिमी और पूर्वी दोनों मोर्चों पर मैदानी लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और अपनी रेजीमेंट पूना हार्स के लिए बसंतर के युद्ध (Battle of Basantar) में सर्वोच्च बलिदान दिया और परमवीर चक्र के हकदार बने।

सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल

सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने बसंतर के युद्ध (Battle of Basantar) में सर्वोच्च बलिदान दिया

भारत के आर्मर्ड कॉर्प के जवानों और अधिकारियों ने अपनी बहादुरी के लिए दो परमवीर चक्र, 15 महावीर चक्र और 60 वीर चक्र के अलावा बड़ी संख्या में वीरता और प्रतिष्ठित सेवा सम्मान हासिल किए हैं। महावीर चक्र और वीर चक्र युद्धकाल में दिया जाने वाला क्रमशः भारत का दूसरा और तीसरा सबसे बड़ा वीरता सम्मान है।

आर्मर्ड कॉर्प ने विद्रोहियों के खिलाफ आपरेशन में भी काफी योगदान दिया है। इसमें राष्ट्रीय राइफल्स, असम राइफल्स और अन्य अर्धसैनिक बलों के साथ सेवा शामिल है। कोर लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए योगदान देती है।

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