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200 साल का हुआ ‘खुकरी’ फेम 9 गोरखा राइफल्स

9 गोरखा रायफल्स सबसे पुराने सैन्य ताकतों में से एक है। इसकी स्थापना अंग्रेजों के समय में आज के ही दिन यानि 30 जनवरी 1817 को की गई थी। इसमें मुख्यत: नेपाली क्षत्रिय और ठाकुरी समुदाय के लोगों की भर्ती की जाती है।

नई दिल्ली: आज 9 गोरखा राइफल्स अपना 200वां स्थापना दिवस मना रही है। इस मौके पर आर्मी चीफ जनरल बिपिन सिंह रावत ने बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। रैली दिल्ली से शुरू होकर सिलीगुड़ी में खत्म होगी। 9 गोरखा राइफल्स सबसे पुराने सैन्य ताकतों में से एक है। इसकी स्थापना अंग्रेजों के समय में आज के ही दिन यानि 30 जनवरी 1817 को की गई थी। इसमें मुख्यत: नेपाली क्षत्रिय और ठाकुरी समुदाय के लोगों की भर्ती की जाती है। इसमें गोरखा को भी भर्ती किया जाता है। फिलहाल, इसमें 20 फीसदी गोरखा जवान सेवारत है।





“अगर कोई व्यक्ति कहता है कि वह मरने से नहीं डरता, तो या तो वह झूठ बोलता है, या फिर वह एक गोरखा है।” ऐसा कहना था भारतीय सेना के पहले फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ जी का। गोरखा सैनिकों के बारे में मान्यता है कि वे निडर होते हैं और किसी भी हालात का सामना करने के लिए हरदम तैयार होते हैं।

सेना की गोरखा रेजीमेंट की सात बटालियन्स में से 9 गोरखा राइफल्स एक है। इसके अलावा 1 गोरखा राइफल्स, 3 गोरखा राइफल्स, 4 गोरखा राइफल्स, गोरखा राइफल्स (फ्रंटियर फोर्स), 8 गोरखा राइफल्स और 11 गोरखा राइफल्स हैं।

ये भी जानें:

  • गोरखा सैनिक आजादी से पूर्व भारत में तैनात ब्रिटिश आर्मी का अभिन्न हिस्सा थे।
  • ब्रिटिश जनरल सर डेविड ऑक्टरलोनी गोरखा सैनिकों की वीरता से बेहद प्रभावित थे। दरअसल, गोरखा सैनिकों ने वर्ष 1857 की क्रान्ति में ईस्ट इन्डिया कंपनी के खिलाफ अभियानों में सक्रियता से भाग लिया था।
  • गोरखा रेजिमेन्ट के सैनिकों को संयुक्त राष्ट्र शान्ति मिशन के तहत लेबनान और सियरा लियोन भी भेजा जा चुका है।
  • आजादी से पहले गोरखा रेजिमेन्ट की संख्या 10 थी। बाद में 6 ने भारतीय सेना से जुड़ना स्वीकार कर लिया। फिलहाल इनकी संख्या 7 है।
  • फिलहाल भारतीय सेना में 40 हजार से अधिक बहादुर गोरखा सैनिक हैं।
  • गोरखा सैनिकों की 7 रेजिमेन्ट और 42 अलग-अलग बटालियन हैं।
  • गोरखा राइफल्स भारतीय सेना का एक बेहद प्रसिद्ध प्लाटून है। इस प्लाटून ने अदम्य शौर्य दिखाते हुए अब तक 11 वीर चक्र, 2 महावीर चक्र, 3 अशोक चक्र और 1 परमवीर चक्र हासिल किए हैं।

  • इस प्लाटून के परमवीर चक्र विजेता लेफ्टिनेन्ट मनोज कुमार पान्डे की वीर गाथा दुनिया के युद्ध इतिहास में एक केस स्टडी है।
  • सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत के दौरान गोरखा सैनिकों ने अदम्य वीरता दिखाई थी।

बाएं से दाएं : फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ, जनरल दलबीर सिंह सुहाग और जनरल बिपिन सिंह रावत

  • गोरखा रेजिमेन्ट ने भारतीय सेना को तीन सेना प्रमुख दिए हैं। सैम मानेकशॉ, जनरल दलबीर सिंह सुहाग और मौजूदा आर्मी चीफ जनरल बिपिन सिंह रावत।

  • गोरखा सैनिकों की पहचान ‘खुकरी’ है। 12 इंच लम्बा यह धारदार हथियार दरअसल उनकी यूनिफॉर्म का हिस्सा है।

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