Air Force

मार्शल अर्जन सिंह ने किया वायुसेना का कायाकल्प

अर्जन सिंह

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के महान योद्धा, निडर पायलट और इकलौते मार्शल अर्जन सिंह को सोमवार को फ्लाइ पास्ट और 21 तोपों की सलामी के साथ अंतिम विदाई दी गई। शनिवार को उनका निधन हो गया था। वर्ष 1965 की लड़ाई में पाकिस्तान को धूल चटाने वाले अर्जन सिंह बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। वे कुशल पायलट, प्रेरक लीडर और बेहतरीन प्रशासक थे। दुनियाभर की वायुसेनाओं की उन्हें गहरी जानकारी थी। भारतीय वायुसेना का कायाकल्प करने का श्रेय़ उन्हें जाता है।





कभी रिटायर नहीं हुए

अर्जन सिंह

मार्शल ऑफ इंडियन एयरफोर्स अर्जन सिंह की युवावस्था की तस्वीर

अर्जन सिंह वायुसेना के एकमात्र अधिकारी रहे जिन्होंने मार्शल की सर्वोच्च रैंक (फाइव स्टार) हासिल की। वायुसेना का मार्शल रैंक भारतीय सेना में फील्ड मार्शल रैंक के बराबर होता है। भारतीय सेनाओं में पांच स्टार वाले सिर्फ तीन सैन्य अधिकारी हुए। अर्जन सिंह के अलावा फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा भी पांच स्टार वाले अधिकारी थे। ये तीनों सेना से कभी रिटायर नहीं हुए।

19 वर्ष की उम्र में पायलट ट्रेनिंग के लिए चुने गये

अर्जन सिंह

युवावस्था में एक बेस पर साथियों के साथ मार्शल अर्जन सिंह (फाइल)

15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अब पाकिस्तान में) जन्मे अर्जन सिंह 19 वर्ष की उम्र में पायलट की ट्रेनिंग के लिए चुने गये और रॉयल एयरफोर्स कॉलेज से जुड़े।

रणभूमि में लॉर्ड माउंटबेटन ने किया सम्मानित

मार्शल अर्जन सिंह
दूसरे विश्वयुद्ध में उन्होंने अदम्य साहस का प्रदर्शन किया। जापान के खिलाफ इंफाल में उन्होंने हरिकेन विमानों के जत्थे का नेतृत्व किया। पन्द्रह महीने तक वह युद्ध के मैदान में रहे। उनके साहसिक कारनामों की खबर लॉर्ड माउंटबेटन तक भी पहुंची। लॉर्ड माउंटबेटन उनसे मिलने के लिए रणभूमि में पहुंचे और उनकी छाती पर डिस्टिंग्विश्ड फ्लाइंग क्रॉस लगाया। यह अर्जन सिंह की जिंदगी के बेहतरीन पलों में से एक था।

आजादी के दिन फ्लाइ पास्ट का किया नेतृत्व

लालकिला

15 अगस्त 1947  को देश आजाद हुआ। लाल किले और दिल्ली के ऊपर से 100 विमानों ने करतब दिखाए। इस फ्लाइ पास्ट का नेतृत्व अर्जन सिंह ने ही किया था।

45 वर्ष की उम्र में बने वायुसेना प्रमुख

अर्जन सिंह

1965 के एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर में सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ (फाइल फोटो)

वर्ष 1962 में चीन से लड़ाई के बाद वायुसेना ने नई चुनौतियों के लिए खुद को तैयार करना शुरू किया। अगले ही वर्ष 1963 में उन्हें वायुसेना उप प्रमुख बनाया गया। लगभग एक वर्ष बाद एक अगस्त 1964 को एयर मार्शल के रूप में उन्हें वायुसेना की कमान सौंपी गई।

पाकिस्तान को धूल चटाई

अर्जन सिंह

नई दिल्ली में डिफेंस मुख्यालय में तत्कालीन सेनाध्यक्ष जेएन चौधरी के साथ अर्जन सिंह (फ़ाइल फोटो)

वर्ष 1965 के युद्ध में पाकिस्तान की वायुसेना बेहतर स्थिति में थी, लेकिन अर्जन सिंह के नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान को धूल चटा दी। उस वक्त का किस्सा बेहद प्रसिद्ध है। तत्कालीन रक्षा मंत्री यशवंत राव चव्हाण ने अर्जन सिंह को बुलाकर पूछा कि पाकिस्तान पर हमले के लिए वायुसेना को तैयारी में कितना समय लगेगा। अर्जन सिंह ने जवाब दिया-एक घंटा। दिलचस्प यह कि सिर्फ चालीस मिनट में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान पर हमला बोल दिया। पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में वायुसेना और उनके योगदान के बाद वायुसेना प्रमुख के रैंक को बढ़ाकर एयरचीफ मार्शल कर दिया गया।

साठ तरह के विमान उड़ाए

अर्जन सिंह
वायुसेना प्रमुख बनने के बाद भी अर्जन सिंह विमान उड़ाते रहे। अपने सैन्य जीवन में उन्होंने 60 अलग-अलग तरह के विमान उड़ाए। वर्ष 1969 में सिर्फ 50 वर्ष की उम्र में सेवा निवृत्त होने तक वे विमान उड़ाते रहे। वायुसेना का आधुनिकीकरण कर उन्होने भारतीय वायुसेना को दुनिया की शक्तिशाली वायुसेनाओं में से एक बनाया। उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। सेवा निवृत्ति के बाद वे कई देशों में भारत के राजदूत रहे। वर्ष 1989-90 में वह दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। वर्ष 2002 में सरकार ने उन्हें मार्शल रैंक से नवाजा।

व्हील चेयर से खड़े होकर दी डॉ. कलाम को श्रद्धांजलि

अर्जन सिंह

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को सलामी देते अर्जन सिंह (फाइल)

पिछले काफी समय से अर्जन सिंह व्हील चेयर पर थे। दो वर्ष पहले पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का निधन हुआ तो अर्जन सिंह श्रद्धांजलि देने पालम हवाई अड्डे पर पहुंच गये थे। उस वक्त उन्होंने व्हीलचेयर से उठकर डॉ. कलाम को सलामी दी थी। पिछले वर्ष उनके जन्म दिन के अवसर पर पश्चिम बंगाल के पानागढ़ एयरबेस का नाम बदलकर उनके नाम पर रखा गया।

अर्जन सिंह के नेतृत्व को कभी नहीं भूलेगा भारतः प्रधानमंत्री

अर्जन सिंह

अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि देते प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शोक संदेश में अर्जन सिंह की उल्लेखनीय सेवाओं को याद करते हुए कहा, “भारत वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह के दुर्भाग्यपूर्ण निधन पर दुख प्रकट करता है। हम देश के प्रति उनकी उल्लेखनीय सेवा को याद करते हैं। अर्जन सिंह ने भारतीय वायुसेना के विकास पर ध्यान दिया जिससे हमारी रक्षा क्षमताओं में इजाफा हुआ। भारत

‘1965 में अर्जन सिंह के शानदार नेतृत्व को कभी नहीं भूलेगा’

मार्शल अर्जन सिंह

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ मार्शल अर्जन सिंह

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, महान वायु योद्धा और वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह के निधन पर दुखी हूं। उनके परिवार और वायुसेना समुदाय के प्रति संवेदना। देश 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनके सैन्य नेतृत्व के लिए उनका आभारी है।

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