Air Force

GSAT- 7A की मदद से जमीन से आसमान तक दुश्मनों पर रहेगी वायुसेना की पैनी नजर, जानें 9 अहम बातें

भारतीय वायुसेना को हर तरह से मदद और बढ़त दिलाने के मकसद से GSAT- 7A इसरो का 35वां संचार उपग्रह 19 दिसंबर, 2018 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। भारत के इस सैन्य उपग्रह से भारतीय वायुसेना की नेटवर्क केंद्रित युद्ध क्षमताओं में प्रभावी इजाफा हुआ है। श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित हुए बहुप्रतीक्षित GSAT- 7A भारतीय वायुसेना के सभी एसेट्स यानी विमान, हवा में मौजूद अर्ली वार्निंग कंट्रोल प्लेटफॉर्म, ड्रोन और ग्राउंड स्टेशनों को जोड़ दिया गया और सेंट्रालाइज्ड नेटवर्क तैयार कर हो चुका है। GSAT- 7 और GSAT- 6 के साथ मिलकर ‘इंडियन एंग्री बर्ड’ कहा जाने वाला यह सैटेलाइट संचार उपग्रहों का एक बैंड बना देगा जो भारतीय सेना के काम आएगा। आज आपको बताने जा रहे हैं वायुसेना को ताकत देने वाले GSAT- 7A सैटेलाइट की खास बातें-





GSAT- 7A का वजन 2,250 किलोग्राम

GSAT-7A

2,250 किलोग्राम वजनी सैन्य संचार उपग्रह GSAT- 7A बुधवार (19 दिसंबर) को श्रीहरिकोटा से जियो सिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क- III (GSLV- Mk III) के जरिए लॉन्च किया गया।

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