Air Force

Eject नहीं कर पाए पायलट दिवेश पंकज और अचु देव

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के उस सुखोई-30MKi (SU-30) के दोनों पायलट स्क्वाड्रन लीडर दिवेश पंकज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट अचु देव एस. की मौत की पुष्टि हो गई है। वायुसेना के प्रवक्ता के मुताबिक़ हालात से लगता है कि दोनों पायलट खुद को काकपिट से Eject करने से पहले ही बुरी तरह घायल हो गए थे। अचु देव एस. के पिता पी. वी. सहदेवन इसरो में साइंटिस्ट रहे हैं। बताया जाता है कि घटनास्थल पर चक्रवाती तूफ़ान की वजह से अभी भी मौसम खराब है। दोनों की बाडी अभी नहीं मिल पाई है।





8 साल में सुखोई (SU-30MKi) के 8 हादसे…Click Here
सुखोई-30 MKi

लड़ाकू विमान सुखोई-30 MKi के मलबे चीन बॉर्डर के पास मिले।

सुखोई-30 MKi लड़ाकू विमान

25 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अचु देव एस. केरल के रहने वाले हैं और नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) के 121वें कोर्स के कैडेट रहे (फाइल फोटो)

दिवेश पंकज

स्क्वाड्रन लीडर दिवेश पंकज (फाइल फोटो)

थल सेना, वायुसेना और नौसेना के अलावा नागरिक प्रशासन के राहत दल के सदस्यों ने दोनों पायलटों में से एक के खून से लथपथ जूता, अधजला पैन कार्ड और पर्स (Wallet) बरामद किया। 23 मई को तेजपुर से उड़ान भरते ही क्रैश हुए विमान का मलबा 26 मई को दिखाई दे गया लेकिन ये सामान 31 मई को मिला। घने जंगल में क्रैश हुए इस लड़ाकू विमान के मलबे के बाद ब्लैक बाक्स भी मिल चुका है। इस मामले में वायुसेना पहले ही कोर्ट आफ इन्क्वायरी का आदेश दे चुकी है।

गौरतलब है कि मध्य असम के शोणितपुर जिलांतर्गत तेजपुर हवाई अड्डे से 23 मई को सुबह 10.30 बजे एयरफोर्स (Indian Airforce) का दो इंजन वाला सुखोई-30MKi  नियमित उड़ान रवाना हुआ था। ‘सुखोई-30’ का रडार से संपर्क दिन के 11.30 बजे के आसपास तक था। उस समय वह तेजपुर से 60 किमी दूर उत्तर में था। इस समय तक वह डूबिया स्थित वायुसेना नियंत्रण कक्ष के संपर्क में था। इसके बाद से रडार से उसका संपर्क टूट गया। आखिरी बार सुखोई-30 को अरुणाचल प्रदेश और चीन बार्डर पर डाल्संग इलाके में देखा गया था।

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