Air Force

टेकऑफ के बाद ‘सुखोई-30’ लापता, दुर्घटना की आशंका

सुखोई-30

तेजपुर। मध्य असम के शोणितपुर जिलांतर्गत तेजपुर हवाई अड्डे से सुबह 10.30 बजे एयरफोर्स (Indian Airforce) का दो इंजन वाला सुखोई-30MKi  नियमित उड़ान रवाना हुआ। एयरफोर्स सूत्रों ने बताया है कि ‘सुखोई-30’ का रडार से संपर्क दिन के 11.30 बजे के आसपास तक था। उस समय वह तेजपुर से 60 किमी दूर उत्तर में है। इस समय तक वह डूबिया स्थित वायुसेना नियंत्रण कक्ष के संपर्क में था। इसके बाद से रडार से उसका संपर्क टूट गया। आखिरी बार सुखोई-30 को अरुणाचल प्रदेश और चीन बार्डर पर डाल्संग इलाके में देखा गया था।





बता दें कि 15 मार्च को बाड़मेर में सुखोई-30 दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। पायलट सुरक्षित बच गए थे। उसी दिन इलाहाबाद के बमरौली में भी एयरफोर्स का विमान चेतक दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

सूत्रों ने बताया कि सुखोई-30 में एयरफोर्स के दो पायलट सवार थे। शोणितपुर और लखीमपुर जिले के सीमाई इलाके नारायणपुर के बरडूबिया इलाके तक विमान से रडार का संपर्क था। उसके बाद अचानक वह रडार से गायब हो गया। एयरपोर्ट अथारिटी ने आशंका जताई है कि सुखोई-30 अरुणाचल प्रदेश के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया है।

60 kilometres north of Tezpur, near Doulasang area of Arunachal Pradesh, which is a border area adjoining China.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 में भी तेजपुर से उड़ान भरने के बाद सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। विमान का मलवा तेजपुर से 35 किमी दूर अरुणाचल प्रदेश के दक्षिणी जंगली इलाके में बरामद किया गया था। एयर फोर्स विमान को ढूंढने में जुट गया है। वहीं जिला प्रशासन की मशीनरी भी विमान को ढूंढने में जुट गई हैं।

ऐसा है ये फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई- Su-30MKI

रूस की मदद से बना फाइटर एयरक्राफ्ट सुखोई भारतीय सेना का सबसे ज्यादा तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू विमान है। उड़ने के दौरान हवा में इसकी फुर्ती और गति ही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। यह 2,100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है। सुखोई विमान में 14 रॉकेट या परमाणु क्षमता वाली मिसाइलें  जैसे ब्रह्मोस भी तैनात की जा सकती हैं।

इस विमान में कम ईंधन खपत वाले दो जेट इंजन लगे होते हैं। अगर एक इंजन बीच में खराब हो जाता है तो यह विमान एक इंजन से ही उड़ सकता है। यह चालाकी से दुश्मन के इलाके में घुसने और उसके हवाई क्षेत्र पर कब्जे करने में सेना की मदद करता है। यह फाइटर जेट करीब चार घंटे में 3,000 किमी तक की दूरी के मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है। इतना ही नहीं आकाश में उड़ान के दौरान ही इसमें किसी विमान से ईंधन भरा जा सकता है। यह लगातार 10 घंटे तक हवा में रह सकता है।

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