Air Force

स्पेशल रिपोर्ट: भारतीय वायुसेना ने सीखे करगिल युद्ध से सबक

वायुसेना ने सीखा करगिल युद्ध से सबक
फोटो सौजन्य- गूगल

नई  दिल्ली। साल 1999 में  करगिल की लड़ाई के दौरान भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के  तहत  भारतीय वायुसेना ने पहली बार अपने मिग-21 लड़ाकू विमानों से रात के वक्त आसमान से करगिल की पहाड़ियों पर बैठे पाकिस्तानी सैन्य घुसपैठियों के ठिकानों को बम वर्षा कर ध्वस्त किया था।





 वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी एस धनोआ करगिल की लड़ाई के दौरान श्रीनगर स्थित 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग अफसर थे। करगिल की ल़डाई की बीसवीं सालगिरह पर यहां आयोजित एक गोष्ठी में  वाय़ुसेना  प्रमुख ने करगिल की लड़ाई के दौरान ‘आपरेशन सफेद सागर’ की याद करते हुए कहा कि साल 1999 में वायुसेना के सामने कई  सीमाएं थीं। करगिल की लड़ाई से सबक सीख कर भारतीय वायुसेना ने आज अपनी हमलावर क्षमता में भारी बढ़ोतरी की है।

एयर चीफ मार्शल धनोआ ने कहा कि तब भारतीय वायुसेना के पास अचूक निशाना लगा कर बम बरसाने की क्षमता केवल मिराज-2000 विमानों में ही थी लेकिन आज यह क्षमता कई अन्य लड़ाकू विमानों जैसे   सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर,  मिग-29 और मिग-27 में अचूक निशाना लगाने की क्षमता तैनात कर दी गई है।

वायुसेना प्रमुख ने आज की एडवांस्ड तकनीक से लैस लड़ाकू विमानों की चर्चा करते हुए कहा कि  मिग-29, मिग-27 और  जगुआऱ लड़ाकू विमानों में नजरों से दूर तक जाने वाली (BVR) मिसाइलें तैनात हो चुकी हैं। ये मिसाइलें दुश्मन के ठिकानों पर अचूक वार कर सकती हैं।

भारतीय वायुसेना के पास अब अवाक्स जैसे टोही विमान आ गए हैं जो दुश्मन के इलाके के काफी भीतर जा कर देख सकते हैं। इन विमानों से दुश्मन की वायुसैनिक गतिविधि की पूरी जानकारी ली जा सकती है। ये विमान  सुरक्षित संचार प्रणाली और  नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर प्रणाली से लैस हैं। भारतीय वायुसेना आज  युद्ध के हर क्षेत्र में पारंगत हो चुकी  हैं चाहे यह  खुला पारम्परिक युद्ध हो या करगिल जैसा सीमित युद्ध हो या किसी आतंकवादी हमले से निपटने की बात हो भारतीय वायुसेना संकट के हर वक्त लड़ने को तैयार है।

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