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स्पेशल रिपोर्ट: राफेल पर सीएजी रिपोर्ट से सरकार खुश

राफेल-विमान

नई  दिल्ली। भारतीय वायुसेना के लिये 36 राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे को लेकर चल रहे विवाद को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ( सीएजी) की बुधवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट से थमने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन इस रिपोर्ट के बाद जहां एनडीए सरकार अपनी जीत का दावा कर सकती है वहीं विपक्ष कह सकता है कि इस रिपोर्ट से राफेल सौदे पर लगे आरोपों  के बादल छटेंगे नहीं।





 इस रिपोर्ट ने जहां यह कह कर कि राफेल सौदा यूपीए सरकार के दौरान 2002 में  प्रस्तावित सौदे से 2.8 प्रतिशत सस्ता पड़ा है विपक्ष कह सकता है कि सरकार ने 09 प्रतिशत सस्ता होने का दावा किया था।

गौरतलब है कि 36 राफेल विमानों के लिये 7.87 अरब यूरो ( करीब 59 हजार करोड़  रुपये ) का सौदा किया गया था जिसमें विभिन्न तरह की अनियमितताओं के आरोप विपक्ष द्वारा लगाए गए थे।

सीएजी ने यह भी कहा है कि फ्रांसीसी दासो  कम्पनी ने बैंकिंग और परफार्मेंस गारंटी का प्रावधान हटा कर फ्रांसीसी कम्पनी ने अपने लिये पैसे की बचत की । इसका हिसाब सौदे में किया जाना चाहिये था। इस तरह के प्रावधान हर तरह के व्यावसायिक सौदे में होते हैं।  सीएजी ने कहा है कि  भारतीय पक्ष जिस कीमत पर सहमत हुआ वास्तव में कुछ कम होना चाहिये था क्योंकि बैंकिंग गारंटी का प्रावधान हटा दिया गया था।

सीएजी ने यह भी कहा है कि 36 राफेल विमान को आपात खरीद का तर्क सरकार ने दिया था लेकिन वास्तव में अगर पहले के सौदे के अनुरूप कुल 126 राफेल विमानों का सौदा होता तो मूल डिलीवरी वक्त से  केवल एक महीने बाद ही ये विमान भारतीय वायुसेना को मिलने शुरू होते। इस तरह 36 विमानों के सौदे से केवल एक महीने की बचत काफी नहीं कही जा सकती। पहला राफेल विमान  इस साल के अंत में मिलेगा। साल 2007 में फ्रांसीसी कम्पनी ने जो 18 विमान सप्लाई करने का प्रस्ताव रखा था उसकी शुरुआत सौदा सम्पन्न करने के 50 वें महीने से होनी थी। 126 में से 18 की सीधी सप्लाई फ्रांस में बन कर और बाकी 108 का निर्माण भारत में करने का प्रस्ताव था।

लेकिन बाद के सौदे में केवल 36 का ही आर्डर दिया गया जिनकी पूरी सप्लाई फ्रांस से करने का सौदा किया गया। लेकिन सीएजी ने कहा है कि मुख्य बचत भारत विशेष नवीकरण ( इंडिया स्पेसिफिक एनहांसमेंट) में की गई। इसमें करीब 17 प्रतिशत की बचत हासिल की जा सकी। नवीकरण की कुल लागत 1.3 अरब यूरो से अधिक थी।

जहां तक राफेल की मूल कीमत यानी बेसिक प्राइस का सवाल है इसमें फ्रांस के पिछले प्रस्ताव में कोई अंतर नहीं देखा गया। जहां तक सौदे को लागू करने के दौरान पैदा विवादों का सवाल है सीएजी ने कहा है कि ऐसी हालत में भारत को  अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के लिये जाना होगा और फ्रांसीसी सरकार यही सुनिश्चित करेगी कि वह भारत को नुकसान की भरपाई करेगी। सौदे के तहत आफसेट शर्तों के बारे में जो विवाद पैदा हुआ है उस बारे में सीएजी की टिप्पणी उसकी अगली रिपोर्ट में पेश होगी।

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