Air Force

खास रिपोर्ट: वायुसेना को मिलेंगे 21 और मिग-29 विमान

नौसेना का मिग-29
फाइल फोटो

नई दिल्ली। लड़ाकू विमानों की घटती संख्या के संकट से निबटने के लिये तात्कालिक उपाय के तौर पर भारतीय वायुसेना को इसके बेड़े में पहले से मौजूद रूसी मिग- 29 लड़ाकू विमानों  के बेड़े को और मजबूत करने का फैसला किया गया  है। इसके तहत रूस से 21 नये लेकिन पहले से काफी आधुनिक बनाए गए मिग- 29 हवाई सुरक्षा लड़ाकू विमानों को खरीदने का फैसला किया गया है।





नई शस्त्र प्रणालियों से लैस किये जा रहे इन विमानों को आधुनिकतम रेडार, इलेक्ट्रानिक प्रणाली आदि से  लैस किया जा रहा है। नई क्षमता जोड़ने के बाद मिग- 29 विमान 4-5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान कहे जाएंगे। नये आधुनिक बनाए गए मिग- 29 लडाकू विमानों में बेहतर क्षमता वाली रेडार प्रणाली, कंट्रोल एवं एवियानिक्स प्रणाली लगी होगी। इन विमानों में अतिरिक्त ईंधन टैंक भी लगे होंगे जिनसे ये लगातार पांच घंटे तक उड़ते रह सकते हैं। ये विमान दूसरे लड़ाकू विमानों की तुलना में काफी सस्ते यानी करीब 285 से तीन सौ करोड़ रुपये के होंगे।

यहां रक्षा सूत्रों ने बताया कि यह सौदा करीब 90 करोड़ डॉलर यानी 63 सौ करोड़ रुपये का हो सकता है। सूत्र ने बताया कि रूस ने वादा किया है कि इन विमानों के ढांचे तैयार हैं इसलिये 18 महीनों के भीतर इनकी सप्लाई की  जा सकती है। वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी। वायुसेना के बेड़े में मिग- 29 के तीन स्क्वाड्रन दो दशक पहले शामिल किये गए थे।

गौरतलब  है कि वायुसेना के पास 42 स्क्वाड्रन विमान होने चाहिये लेकिन यह संख्या घटकर 30 पर रह गई है। फिलहाल मिग-29 विमानों को पाकिस्तान से लगी पश्चिमी और चीनी सीमाओं पर तैनात किया गया है लेकिन नये मिग- 29 विमानों को चीन से लगी उत्तरी सीमाओं पर तैनात करने की योजना है। मिग- 29 विमानों की मरम्मत के लिये नासिक के निकट ओजहर में एक रिपेयर डिपो भी संचालित  है इसलिये नये शामिल होने वाले मिग- 29 विमानों के लिये कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं खड़ी करनी होगी। वायुसेना में पहले से मौजूद मिग- 29 के बेड़े को यहां और आधुनिक रुप दिया जा रहा है। ओजहर डिपो से यह सुनिश्चित किया जाता है कि  मिग- 29 बेड़े  के 75 प्रतिशत  विमान हमेशा चुस्त दुरुस्त रहें।

Comments

Most Popular

To Top