Air Force

बेहतरीन सेवा के लिए 125 (H) स्क्वार्डन को प्रेसिडेंट्स स्टैंडर्ड और MTI को प्रेसिडेंट्स कलर्स

भारतीय वायुसेना

नई दिल्ली/तम्बरम: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भारतीय वायु सेना की 125 (एच) स्क्वाडर्न को प्रेसिडेंट्स स्टैंडर्ड और मेकेनिकल ट्रेनिंग इस्टीट्यूट (एमटीआई) को प्रेसिडेंट्स कलर्स प्रदान किया। तमिलानाडु के तम्बरम एयरबेस पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल सी विद्यासागर राव, वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ और वायुसेना के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।





इस मौके पर राष्ट्रपति ने वायुसेना के अधिकारियों और जवानों को 125 (एच) स्क्वाडर्न और एमटीआई का गौरवशाली इतिहास याद दिलाया। उन्होंने कहा कि तम्बरम का मेकेनिकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट भारतीय वायुसेना का सबसे पुराना संस्थान है। यहां अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ ट्रेनिंग दी जाती है। उन्होंने 125 (एच) स्क्वाडर्न के काम की तारीफ करते हुए कहा कि यह स्क्वाडर्न ‘बलिदानम वीरम् भूषणम’ के लक्ष्य के साथ हर हालात से निबटने के लिए तैयार रहती है। उन्होंने वायुसेना के तरफ से तरह-तरह से की जा रही देश सेवा का विस्तार से वर्णन करते हुए उन तमाम चुनौती भरे हालात का जिक्र किया जिनका सामना वायुसेना ने बेहद मजबूती से डटे रहकर किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु में बाढ़ के दौरान किए गए साहासिक कार्य और सरहद की निगहबानी में दी जाने वाली योगदान पर खुशी जाहिर की।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय विश्‍व में जिम्‍मेदार तथा उभरती शक्ति है। हमारे क्षेत्र में सामाजिक, आर्थिक तथा भू-राजनीतिक परिदृश्‍य में लगातार हो रहे बदलाव के कारण हमारे देश की प्रगति, समृद्धि और सुरक्षा को प्रभावित करने वाले नापाक इरादों को मजबूती से रोकने की जरूरत हमेशा रही है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने हमारे राष्‍ट्र की संप्रभुता की रक्षा करने में तकनीकी रूप से उन्‍न्‍त इकाई के रूप में विकास किया है। हमारे देश के युवाओं के लिए हमारे वीरों द्वारा प्रदर्शित की गई दृढ़ता और प्रतिबद्धता अनुकरणीय हैं।

बताते चलें कि भारतीय वायु सेना की 125 (एच) स्क्वाडर्न ने पिछले साल पठानकोट वायुसैनिक अड्डे पर हुए आतंकी हमले के दौरान आतंकियों को एक स्थान पर रोककर रखने में अहम भूमिका निभाई थी।

वीडियो: सौजन्य से डीडी न्यूज

इससे पहले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को गॉर्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एयरफोर्स की 6 टुकडियों ने खूबसूरत परेड और शक्ति के साथ-साथ मनोरंजन से भरपूर ड्रिल की। खासतौर से साढ़े पांच किलो वजन वाली थ्री नॉट थ्री रायफलें लेकर खिलौने की तरह उनसे तरह-तरह के करतब दिखाए, वो वाकई हैरान कर देने वाला था और दर्शकों में मौजूद सैन्य अधिकारी और जवानों के परिवार वालों ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका उत्साह बढ़ाया। खासतौर से रायफलों को हवा में उछालना और लपकना, फिरकी की तरह अपने हाथ पर घुमाना आकर्षण के मुख्य केंद्र रहे। कुल मिलाकर ये ड्रिल चपलता, लचीलेपन और शक्ति के मिश्रण का बेहतरीन उदाहरण दिखाई दी।

जमीन ही नहीं आसमान पर भी करतब दिखाए गए। ये करतब दिखाए थे वायुसेना के सूर्यकिरण विमानों ने। जिन्होंने आकाश में अलग-अलग फॉर्मेंशन में उड़ान भरी। कार्यक्रम में प्रशिक्षण कमान के प्रमुख एयर मार्शल एसआरके नायर उनकी पत्नी एयरफोर्स वाइव्स वेलफेयर एशोसिएसन (AFWA) की अध्यक्ष गीतांजलि नायर, पश्चिमी कमान के चीफ एयर मार्शल सी हरी कुमार समेत वायुसेना के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद थे।

‘प्रेसिडेंट्स स्टैंडर्ड’ और ‘प्रेसिडेंट्स कलर्स’ पुरस्कार सर्वश्रेष्ठ हैं, जो वायुसेना को युद्ध और शांति बहाली के दौरान अपनी अतुल्य सेवा के लिए दिए जाते हैं।

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