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हैप्पी बर्थडे अर्जन सिंह ! मार्शल रैंक पाने वाले Air Force के इकलौते अफसर

अर्जन सिंह

नई दिल्ली: मार्शल आफ इन्डियन एयरफोर्स (Marshal of the Indian Air Force) अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को लयालपुर (अब फैसलाबाद,पाकिस्तान) में हुआ था और उन्होंने अपनी शिक्षा मोंटगोमरी (अभी साहिवाल, पाकिस्तान) में पूरी की। उनका बचपन का नाम अर्जन सिंह औलाख है। वह 19 वर्ष की उम्र में पायलट ट्रेनिंग कोर्स के लिए चुने गए। महज पैतालिस साल की आयु में ही वह वायु सेना के प्रमुक बने थे। वह सबसे कम उम्र के वायुसेना प्रमुख बनने वाले अफसर थे।





अर्जन सिंह

युवावस्था में एक बेस पर साथियों के साथ अब के मार्शल ऑफ इंडियन एयरफोर्स अर्जन सिंह

1944 में उन्होंने अराकन अभियान और इम्फाल अभियान में स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर अपने स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया। उनके कुशल नेतृत्व के लिए उन्हें विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) से सम्मानित किया गया। आजादी के दिन 15 अगस्त 1947 को मार्शल ने वायुसेना (Air Force) के सौ से भी अधिक विमानों के लाल किले के ऊपर से फ्लाई पास्ट का भी नेतृत्व किया। 1962 भारत-पाकिस्ता युद्ध में अदम्य साहस दिखाने के लिए उन्हें पद्म विभूषण सम्मान दिया गया था।

अर्जन सिंह

नई दिल्ली में डिफेंस मुख्यालय में तत्कालीन सेनाध्यक्ष जेएन चौधरी के साथ अर्जन सिंह (फ़ाइल फोटो)

पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में उनकी भूमिका के बाद वायु सेना प्रमुख के रैंक को बढाकर पहली बार उन्हें एयर चीफ मार्शल बनाया गया। इससे पहले तक वायुसेना प्रमुख को चीफ ऑफ़ द एयरफोर्स स्टाफ (CAS) कहा जाता था। उन्हें नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से भी सम्मानित किया गया। सेवानिवृत्त होने पर उन्हें स्विटजरलैंड का राजदूत बनाया गया। इसके अलावा वह कीनिया के भी राजदूत रह चुके हैं। वह 1989-90 में दिल्ली के उपराज्यपाल भी रह चुके हैं।  वायु सेना के लिए उनकी सेवाओं के लिए सरकार ने जनवरी 2002 में मार्शल आफ इन्डियन एयरफोर्स से नवाजा। यह उपलब्धि पाने वाले वह वायु सेना के एकमात्र अधिकारी हैं।

मानेक शा, करियप्पा और अर्जन सिंह

सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के. एम. करियप्पा के बाद अर्जन सिंह पांच सितारा रैंक वाले तीसरे भारतीय सैन्य अधिकारी हैं। सैम मानकशॉ और करियप्पा की मौत हो चुकी है।

रगों में फौजी खून

मार्शल अर्जन सिंह का जन्म सैन्य परिवार में ही हुआ था। उनके पिता रिसालदार थे वह एक डिवीजन कमांडर के एडीसी के रूप में सेवा प्रदान करते थे। उनके दादा रिसालदार मेजर हुकम सिंह 1883 और 1917 के बीच कैवलरी से संबंधित थे। उनके दादा नायब रिसालदार सुल्ताना सिंह, 1854 में मार्गदर्शिका कैवलरी की पहली दो पीढ़ियों में शामिल थे, 1879 के अफगान अभियान के दौरान शहीद हुए थे।

अर्जन सिंह

1965 के एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर में सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ एयर मार्शल अर्जन सिंह

अर्जन सिंह को कोर्ट मार्शल का भी सामना करना पड़ा था, जब उन्होंने फरवरी 1945 में केरल के एक घर के ऊपर बहुत नीची उड़ान भरी, उन्होंने ये कहते हुए अपना बचाव किया था कि वह एक प्रशिक्षु पायलट (यह प्रशिक्षु पायलट एयर चीफ मार्शल दिलबाग सिंह थे) का मनोबल बढ़ाने की कोशिश थी।

रक्षा मंत्री ने कुछ इस तरह से किया था अर्जन सिंह का बखान

अर्जन सिंह

जनवरी 1965 में हलवाडा एयरबेस पर 7 स्क्वाड्रन के क्रू के साथ उस समय चीफ आफ एयर स्टाफ रहे अर्जन सिंह और रक्षा मंत्री वाई. वी. चव्हाण

वायु सेना प्रमुख बनाए जाने के समय अर्जन सिंह की उम्र बमुश्किल 44 साल थी और आजादी के बाद पहली बार लड़ाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उनके ही हाथ में थी। अपने कुशल नेतृत्व और दृढ़ता के साथ स्थिति का सामना करते हुए भारत की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मार्शल की प्रशंसा करते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई. बी. चव्हाण ने कहा था, ‘एयर मार्शल अर्जन सिंह हीरा हैं, वह अपने काम में दक्ष और दृढ़ होने के साथ सक्षम नेतृत्व के धनी हैं।’

मार्शल ऑफ़ एयर फ़ोर्स अर्जन सिंह

2015 में भारत-पाकिस्तान युद्ध की गोल्डन जुबली के दौरान मार्शल ऑफ़ एयर फ़ोर्स अर्जन सिंह को सम्मानित करते राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी (फाइल फोटो)

अर्जन सिंह पर किताब

मार्शल अर्जन सिंह पर किताब भी लिखी जा चुकी है। रूपिंदर सिंह ने उन पर ‘अर्जन सिंह: मार्शल ऑफ दि इंडियन एयर फोर्स’ लिखी है। किताब में अर्जन सिंह के द्वितीय विश्व युद्ध और भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965 में दिए गए योगदान के बार में लिखा गिया है।

एयर फोर्स स्टेशन अर्जन सिंह

अर्जन सिंह

पानागढ़ एयरबेस का नाम अपने नाम पर किए जाने के दौरान अर्जन सिंह (फाइल फोटो)

मार्शल अर्जन सिंह के 97वें जन्मदिन से एक दिन पहले यानि 14 अप्रैल 2016 को तत्कालीन वायुसेना प्रमुख अरूप राहा ने पश्चिम बंगाल में स्थित पानागढ़ एयर फोर्स बेस का नाम अर्जन सिंह के नाम पर किया। तब से इसे एयर फोर्स स्टेशन अर्जन सिंह कहा जाता है।

ये सम्मान मिल चुका है मार्शल अर्जन सिंह को

  • जनरल सर्विस मेडल 1947
  • समर सेवा स्टार
  • रक्षा मेडल
  • सैन्य सेवा मेडल
  • इंडियन इंडिपेनडेंस मेडल
  • डीएफसी
  • 1939-1945 स्टार
  • बर्मा स्टार
  • वार मेडल 1939-1945
  • इंडिया सर्विस मेडल
  • पद्म विभूषण
तेजी अर्जन सिंह

पति का जन्मदिन और पत्नी की पुण्यतिथि एक ही दिन : ये है अर्जन सिंह की पत्नी तेजी अर्जन सिंह की फ़ाइल फोटो। तेजी का निधन 15 अप्रैल 2011 को हुआ था। अर्जन सिंह और तेजी का विवाह 15 फरवरी 1948 को हुआ था।

मार्शल अर्जन सिंह का भारतीय वायुसेना में सफ़र

  • 1938: आरएएफ कॉलेज क्रेनवेल में फ्लाइट कैडेट के रूप में चयनित
  • 23 दिसंबर 1939: रॉयल एयरफोर्स में पायलट आफीसर के तौर पर कमीशन मिला
  • 09 मई 1941: फ्लाइंग ऑफीसर बनाए गए
  • 15 मई 1942: फ्लाइट लेफ्टिनेंट
  • 1944: स्क्वाड्रन लीडर (एक्टिंग)
  • 2 जून 1944: प्रतिष्ठित उड़ान क्रॉस (डीएफसी) सम्मान
  • 1947: विंग कमांडर, रॉयल इंडियन एयर फोर्स, एयर फोर्स स्टेशन, अंबाला बनाए गए
  • 1948: ग्रुप कैप्टन, डॉयरेक्टर, ट्रेनिंग, हेडक्वार्टर्स बनाए गए
  • 1949: (एक्टिंग) एयर कॉमोडोर, इंडियन एयर फोर्स, AOC ऑपरेशनल कमांड
  • 2 जनवरी 1955: एयर कॉमोडोर, AOC वेस्टर्न एयर कमांड, दिल्ली बनाए गए
  • 19 दिसंबर 1959: एयर वाइस मार्शल बने
  • 1961: एयर वाइस मार्शल, एयर ऑफीसर इंचार्ज ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, मुख्यालय
  • 1936: वायु सेना के वाइस चीफ
  • 1 अगस्त 1965: चीफ ऑफ एयर स्टाफ (एयर मार्शल) बनाए गए
  • 26 जनवरी 1966: चीफ ऑफ स्टॉफ कमेटी नियुक्त किए गए
  • 16 जनवरी 1970: भारतीय वायुसेना से रिटायर हुए
  • 26 जनवरी 2002: मार्शल ऑफ द इंडियन एयर फोर्स (फील्ड मार्शल) यानि पांच सितारा सैन्य अधिकारी। अर्जन सिंह से पहले यह सम्मान फील्ड मार्शल केएम करियप्पा और मानेक शा को ही मिला था।

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