Air Force

भारतीय वायुसेना प्रमुख ने भरी लड़ाकू विमान राफेल में उड़ान

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ

नई दिल्ली। फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान उड़ाने के एक दिन बाद भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने बुधवार को कहा कि वह विमान और इसकी इंटिग्रेटेड वेपन सेंसर की बेहतरीन स्विंग रोल क्षमता से काफी प्रभावित हुए हैं। लड़ाकू विमान राफेल उड़ाने वाले धनोआ पहले भारतीय हैं। वायुसेना प्रमुख फ्रांस की यात्रा पर है। उन्होंने सेंट-डिजियर एयरबेस में राफेल विमान उड़ाया, ताकि खुद इसका अनुभव ले सकें।





फ्रांस से राफेल खरीद रही है भारतीय वायुसेना

भारतीय वायुसेना पिछले साल सितंबर में हुए करीब 59,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीद रही है। सूत्रों के मुताबिक धनोआ ने कहा, ‘टू वर्सेज टू मिशन’ के तहत मैंने राफेल उड़ाया। मुझे राफेल की बेहतरीन स्विंग (पलटने की क्षमता), रोल क्षमता और इसके इंटिग्रेटेड वेपन सेंसर और टिकाऊपन ने काफी प्रभावित किया है’। बता दें इस मिशन के तहत दो मिराज- 2000 D और दो राफेल विमान मुकाबले में उतरे थे।

एयर चीफ मार्शल बीएस धनोवा

धनोआ ने कहा- वह विमान और इसकी इंटिग्रेटेड वेपन सेंसर की बेहतरीन स्विंग रोल क्षमता से काफी प्रभावित हैं।

एयर चीफ मार्शल धनोआ ने राफेल बनाने वाली कंपनी के शीर्ष अधिकारियों से लड़ाकू विमान की भारत में सप्लाई को लेकर भी बात की।

डील फाइनल होने में लगे 9 साल

पिछले वर्ष सितंबर में प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के साथ 36 राफेल खरीदने का सौदा किया था। राफेल डील अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है। इस डील पर बातचीत साल 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन फाइनल 2016 में हो पाई।

ये हैं राफेल की खूबियां

राफेल की खूबियों की बात करें तो इसके शामिल होने से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता में काफी इजाफा होगा। ये विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं। साथ ही इसे मिसाइल ले जाने के लिए भी तैयार किया जा रहा है।

राफेल लड़ाकू विमान भारत करीब 59,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीद रहा है।

  • राफेल का फ्रेंच में मतलब होता है ‘तूफ़ान’।
  • ये दो इंजन वाला मल्टी रोल लड़ाकू विमान है।
  • इसकी ईंधन क्षमता 4,700 लीटर तथा गति 2250 से 2500 किमी प्रति घंटा है।
  • यह लगातार 10 घंटे उड़ सकता है।
  • ब्रह्मोस जैसी 6 मिसाइल ले जाने में सक्षम है।
  • एयरक्राफ्ट कैरियर से भी उड़ान भर सकता है।
  • इराक और लीबिया में इसका इस्तेमाल किया जा चुका है।

वायु सेना के लिए क्यों जरूरी है राफेल ?

एयरफोर्स के पास अभी 44 फाइटर स्क्वॉड्रन हैं, लेकिन पुराने प्लेन फेज आउट होने से 34 स्क्वॉड्रन ही बचे हैं। फाइटर्स प्लेन की सख्त जरूरत है। आखिरी बार वायुसेना को 1996 में रूस से सुखोई- 30 MKi मिले थे। पुराने हो चुके मिग-21 और मिग-27 विमान बेड़े से हटाए जा रहे हैं। एयर चीफ मार्शल धनोआ 20 जुलाई तक फ्रांस की यात्रा पर हैं, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों की वायुसेनाओं में सहयोग बढ़ाया जा सके।

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