Air Force

पायलट को 55 लाख मुआवजा देने का आदेश, जानिए क्यों

संजीत-सिंह -कायला

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को 2005 में एक मिग-21 के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद अयोग्य करार दिए गए भारतीय वायुसेना के एक अधिकारी को 55 लाख रुपये बतौर मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट और न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ ने यह कहते हुए कि सशस्त्र सेनाओं को इससे ज्यादा खतरे में नहीं डाला जा सकता, केंद्र को पांच लाख रुपये और विमान निर्माता कंपनी को 50 लाख रुपये देने का आदेश दिया।





2013 में विंग कमांडर संजीत सिंह कायला ने अदालत में गुहार लगाकर सरकार और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को दुर्घटनाग्रस्त हुए मिग-21 विमान के कथित त्रुटिपूर्ण निर्माण के लिए औपचारिक रूप से माफी मांगने का निर्देश देने को कहा।

अदालत ने कहा कि सशस्त्र सेनाओं के अधिकारियों को सामान्य से अधिक जोखिम में डालना जीवन के मौलिक अधिकार और खासतौर पर संविधान द्वारा प्रदत्त सुरक्षित माहौल में काम करने के अधिकार के विरुद्ध है। पीठ ने कहा कि HAL को अधिकारी को जोखिम में डालने के लिए मुआवजा देना चाहिए।

कायला ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून के तहत एक अदालत की जांच में साबित हुआ था कि दुर्घटना विमान के निर्माण में त्रुटि के कारण हुई। उन्होंने कहा कि याचिका दायर करने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को इस देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के अपने कृत्यों के लिए जवाबदेह बनाया जाए।

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