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अब्दुल हमीद की शहादत विफल नहीं होने देंगे: आर्मी चीफ

बिपिन-रावत

गाजीपुर। 1965 की जंग में जांबाज अब्दुल हमीद की शहादत यूं ही विफल नहीं होगी। गाजीपुर की यह भूमि धन्य है जिसने इस बहादुर नौजवान को जन्म दिया। ये वो शब्द हैं जो अब्दुल हमीद के 52वें शहादत दिवस के मौके पर भारतीय सेना प्रमुख बिपिन रावत ने कहे। शहादत दिवस के मौके पर रविवार को बिपिन रावत अब्दुल हमीद के पैतृक गांव में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। कार्यक्रम में मौजूद लोग उस समय भावुक हो उठे जब वर्दी में पहुंचे सेना के सबसे आला अधिकारी ने वीर अब्दुल हमीद की पत्नी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। सेना प्रमुख ने रसूलन बीबी को सम्मानित भी किया।





उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के अब्दुल हमीद के पुश्तैनी गांव धामपुर में पहली बार देश के सेनाध्यक्ष के पहुंचने का युवाओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। आर्मी चीफ ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा- ‘अब्दुल हमीद के शहादत दिवस समारोह में शामिल होने का मौका मिलने पर अपने आपको धन्य महसूस कर रहा हूं।’ आर्मी चीफ ने अब्दुल हमीद की शहादत को विफल होने न देने की बात इसलिए कहीं क्योंकि उनका कहना था कि यहां की धरती से और नौजवान फौज में भर्ती किए जाएंगे।

डोकलाम पर भारत-चीन के बीच समझौता

दूसरी तरफ मीडिया ने डोकलाम मुद्दे पर सवाल किया तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि जैसा कि आप सभी जानते हैं कि डोकलाम में बिल्कुल सामान्य स्थिति है। भारत-चीन के बीच जो समझौता हुआ है और हम यही चाहेंगे कि यह समझौता कायम रहे और अमन और शांति का माहौल बना रहे।

उन्होंने पाकिस्तान के मामले पर कहा कि ‘गोली से नहीं, बोली से बात करने’ की जो बात कही जा रही है, उस मामले में हमारा शीर्ष नेतृत्व फैसला करेगा।

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