Air Force

लोगों को बचाने के बाद…आखिरी उड़ान !

विंग कमांडर मंदीप सिंह ढिल्लन

नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना में हादसों की कड़ी में 4 जुलाई को एक और हादसा और जुड़ गया है। विंग कमांडर मंदीप सिंह ढिल्लन और को-पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट पीके सिंह इस हादसे का शिकार हो गए। हादसा अरुणाचल प्रदेश के पापुम परे जिले के सगली गांव में राहत और बचाव कार्य के दौरान हुआ। विंग कमांडर ढिल्लन भारतीय वायुसेना के बेहतरीन पायलट में से एक थे और 115 हेलिकॉप्टर यूनिटके कमांडिंग ऑफिसर भी थे।





क्रैश-हेलिकॉप्टर-का-मलबा

ढिल्लन और को-पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट पीके सिंह के साथ अरुणाचल प्रदेश के सगली गांव में राहत और बचाव कार्य के दौरान हादसे का शिकार हुए थे

विंग कमांडर मंदीप सिंह ढिल्लन और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पीके सिंह को भूस्खलन में फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों तक पहुंचाने के आदेश मिले थे। ख़राब मौसम के बावजूद भी हादसे से पहले वो 5 उड़ानों में 160 से भी ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाल चुके थे। जब छटी उड़ान की बारी आई तो उन्होंने ख़राब मौसम को देखते हुए निर्णय लिए के वो किसी सिविलियन की जान खतरे में नहीं डालेंगे और उन्होंने किसी भी नागरिक को हेलिकॉप्टर में सवार नहीं किया। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद उनका संपर्क ग्राउंड स्टेशन से टूट गया और हेलिकाप्टर क्रैश हो गया। क्रैश के दौरान हेलिकॉप्टर में विंग कमांडर ढिल्लों और लाइट लेफ्टिनेंट सिंह के अलावा भारतीय वायु सेना के एक फ्लाइट इंजीनियर और अरुणाचल का एक पुलिसकर्मी भी सवार था। चारों लोग हादसे का शिकार हो गए।

विंग कमांडर ढिल्लन को 18 साल से भी अधिक उड़न का अनुभव था, वो एक बेहतरीन पायलट थे। बर्फीले पहाड़ों से ले कर खतरनाक जंगलों तक हर जगहों पर हेलिकॉप्टर उड़ा चुके थे। ढिल्लन एक वायुसेना परिवार से ताल्लुक रखते है। उनके पिता भी वायु सेना से बतौर स्कॉडन लीडर रिटायर हो चुके है। ढिल्लन राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC) देहरादून के छात्र थे। RIMC से उत्तीर्ण होने के बाद उन्होंने NDA में बतौर वायुसेना कैडेट दाखिला लिया। विंग कमांडर ढिल्लन जैसे होनहार पायलट का शहीद होना भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी हानि है।

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