Air Force

वायुसेना को मिला ऐसा एयरचीफ जिसके परिवार की 4 पीढ़ियां कर चुकी हैं देश की सेवा

नए एयर चीफ भदौरिया

नई दिल्ली। जिस परिवार की चार पीढ़ियां भारतीय वायुसेना में पूरी मुस्तैदी और जांबाजी के साथ सेवारत रहीं हों, परदादा सूरज पाल सिंह भदौरिया वायुसेना में मास्टर वारंट ऑफिसर के पद पर रह चुके हों, दादा दूसरे विश्व युद्ध में अपना कौशल दिखा चुके हों, खुद लंबे समय तक भारतीय वायुसेना के साथ जुड़े रहकर अब भारत के नए वायुसेना चीफ बनने जा रहे हैं और बेटी सोनाली भी एयरफोर्स का अहम हिस्सा हो, तो ऐसा परिवार विरला ही कहा जाएगा। जी हां, हम बात कर रहे हैं इन पंक्तियों के माध्य्यम से होने वाले नए वायुसेना प्रमुख राकेश भदौरिया के बारे में जो 30 सितंबर को बीरेंद्र सिंह धनोआ के रिटायर होने के बाद भारत की जांबाज वायुसेना की कमान संभालेंगे।





मौजूदा समय में राकेश कुमार भदौरिया उप वायुसेना अध्यक्ष हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के आगरा के पास कोरथ गांव में हुआ था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी पुणे के छात्र रह चुके हैं और उन्होंने कमांडेंट स्टाफ कॉलेज से डिफेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। राष्ट्रीय रक्षा एकेडमी से पास आउट भदौरिया को जून, 1980 में एयरफोर्स की युद्धक शाखा में रखा गया था। वह राफेल फाइटर प्लेन उड़ाने वाले वायुसेना के पहले पायलट हैं। उनके पास 26 प्रकार के लड़ाकू विमानों को 4,250 घंटे उड़ाने का अनुभव है।

वाइस चीफ एयर मार्शल राकेश कुमार भदौरिया

उनकी पत्नी का नाम आशा भदौरिया है। उनकी दो संतानें हैं- एक बेटा और एक बेटी।

देश का नया एयर चीफ बनने के बाद उनके गांव के निवासी काफी खुश हैं और एक-दूसरे का मुंह मीठा करा रहे हैं। उनकी चाची ने एक अंग्रेजी अखबार को बताया कि जब भदौरिया छोटे से थे तो अपने दादा से कहा करते थे वह एक दिन पायलट बनेंगे। और आप मुझे जहाज उड़ाता देख पाएंगे। एयर मार्शल भदौरिया के चचेरे भाई संदीप भदौरिया कहते हैं- हमारे परिवार के खून में बहादुरी और नेतृत्व का गुण है। हमारे दादा जी सोबरन सिंह ब्रिटिश सेना में थे उनके पिता सूरज पाल सिंह भदौरिया वायुसेना में मास्टर वारंट ऑफिसर के पद पर अपनी सेवा दे चुके हैं।

गौरतलब है कि राकेश कुमार भदौरिया की बेटी सोनाली भी वायुसेना में पायलट हैं। गांव के निवासी बताते हैं राकेश और उनके परिवार को कोरथ गांव आए एक लंबा समय हो गया है।

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