Air Force

वायुसेना के जाबांजों ने सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंटी चोटियों पर फहराया तिरंगा

एयरचीफ मार्शल धनोआ

नई दिल्ली। दुनियाभर में अपने साहसिक कारनामों के लिए विख्यात भारतीय वायुसेना ने पिछले दिनों अंटार्कटिका की सबसे ऊंची तथा दुनिया की सबसे दुर्गम और दुरूह चोटी माउंट विन्सन पर फतह हासिल कर देश का नाम रोशन किया है। सोलह हजार पचास फुट की ऊंचाई पर स्थित माउंट विन्सन पर फतह हासिल करने के साथ ही भारतीय वायुसेना सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने वाली दुनिया की पहली सेना बन गई है। गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना के पर्वतारोहियों का एक विशेषज्ञ दल पहले ही छह महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर फतह हासिल कर चुका था। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी.एस धनोआ ने गुरुवार को चोटी पर विजय हासिल कर लौटे दल का स्वागत किया।





ग्रुप कैप्टन आर.सी. त्रिपाठी के नेतृत्व में वायु सेना के पर्वतारोही दल को गत 8 दिसंबर को वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने झंडी दिखा कर रवाना किया था।

यह दल 25 दिसम्बर, 2017 को 1845 बजे अंटार्टिका की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा झंडा और भारतीय वायु सेना के झंडे को गौरव के साथ फहरा कर वापस लौट आया है। गुरुवार को एक समारोह में वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने दल के नेता ग्रुप कैप्टन आर. सी. त्रिपाठी से बर्फ काटने वाली कुल्हाडी और तिरंगा झंडा प्राप्त करने के बाद दल का स्वागत किया। वायु सेना प्रमुख ने अभियान के दौरान बाधाओँ से लड़ने में बहादुरी के लिए दल की सराहना की। उन्होंने दल को सभी महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा झंडा लहराने के ऐतिहासिक कार्य के लिए बधाई दी। भारतीय वायु सेना भारत का पहला संगठन है जिसने 7 चोटियों का अभियान पूरा किया हो। यह एक दुर्लभ उपलब्धि है।

भारतीय वायुसेना साहसिक चुनौतियों को पूरा करने में हमेशा अग्रणी रही है। भारतीय वायुसेना का 7 चोटी मिशन सभी 7 महाद्वीपों के शीर्ष पर्वतों पर राष्ट्रीय तिरंगा फहराने के उद्देश्य से किया गया था। 2005 में माऊंट एवरेस्ट पर पहुंचने का इतिहास बनाने के बाद भारतीय वायु सेना ने 2008 में मिशन सात शिखर पर्वतारोहण अभियान की अप्रत्यशित श्रृंखला लांच की थी।

ग्रुप कैप्टन आर.सी. त्रिपाठी ने अभियान की चुनौतियों के बारे में बताया कि अंटार्कटिका को लेकर मन में कुछ आशंकाएं थी लेकिन हमें अपनी तैयारी और स्वयं पर भरोसा था। उन्होंने बताया कि वहां मौसम बेहद सर्द था। ठंडी हवाएं 40 से लेकर 100 किलोमीटर तक चल रही थी। हालांकि उन्हें अपना अभियान कुछ छोटा करना पड़ा। अभियान दल ने सातों चोटियों पर फतह को अपने सहयोगी स्कवाड्रन लीडर एसएस चैतन्य तथा सार्जेंट शांतनु को समर्पति किया जिनकी वर्ष 2005 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई के वक्त मृत्यु हो गई थी।

भारतीय वायु सेना अपने कर्मियों के लिए नियमित आधार पर साहसिक कार्यों और खेलों को प्रोत्साहित करती है और वायु सेना कर्मियों के साहस और शौर्य को महत्वपूर्ण स्थान देती है। शांति काल में साहसिक कार्यों में शामिल होने से सेना को मजबूती मिलती है नेतृत्व और साथियों के साथ सहयोग की भावना बढ़ती है तथा कारगर ढंग से निर्णय लिया जाता है। भारतीय वायु सेना के इन करतबों से उसका नारा ‘गर्व से आसमान को छुओ’ सत्य प्रतीत होता है।

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