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ये हैं भारत के 8 सबसे खतरनाक कमांडोज..

भारतीय कमांडोज

हर देश को ताकतवर बनाने के पीछे उसकी स्पेशल फोर्सेस का हाथ होता है जिसके दम पर हर देश दुनिया के सामने एक नई शक्ति के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। विशेष सैन्य और रक्षा बल ही अपने देश का सम्मान और विश्व में एक बिल्कुल अलग पहचान बनाते हैं। भारत में भी देश की सुरक्षा का जिम्मा इन जांबाजों के हाथों में होता है। आज भारत आतंकी हमले से निपटने को तैयार है चाहें वे कश्मीर के रास्ते हो या चीन के रास्ते। ये बात जानकर आश्चर्य होगा कि भारतीय कमांडो फोर्स को अलर्ट रहने के लिए और दुश्मन के अचानक हुए हमले से संभलने के लिए आधे घंटे से भी कम का समय मिलता है।





मार्कोस मरीन कमांडो

 

मार्कोस कमांडोज

मार्कोस कमांडोज

मार्कोस मरीन कमांडो सबसे ट्रेंड और आधुनिक माने जाते हैं। मार्कोस को दुनिया के बेहतरीन यूएस नेवी सील्स की तर्ज पर तैयार किया गया है। मार्कोस कमांडो बनाना आसान नहीं है। इसके लिए कड़े इम्तहान से होकर गुजरना पड़ता है फिर कमांडोज चुने जाते हैं।इन्हें अमेरिकी और ब्रिटिश सील्स के साथ ढाई साल की कड़ी ट्रेनिंग करनी होती है। देश के ये कमांडो जमीन, समंदर और हवा में लड़ने के लिए पूरी तरह से सक्षम होते हैं। मार्कोस कमांडो भारतीय नौसेना का हिस्सा है।

 

पैरा कमांडो

 

पैरा कमांडो

पैरा कमांडो

मार्कोस के बाद नंबर आता है पैरा कमांडोज का जो भारतीय आर्मी की सबसे ज्यादा प्रशिक्षित स्पेशल फोर्स मानी जाती है। सेना के सिर्फ उन्हीं जवानों को इस स्पेशल फोर्स का हिस्सा बनने का मौका मिलता है जो शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ और बलवान होने के साथ ही बेहद समझदार और प्रेरित हों। इन कमांडो की शुरुआत शरीर पर 65 किलो वजन और कई किलोमीटर दौड़ के साथ होती है। पैरा कमांडोज के जिम्मे स्पेशल ऑपरेशन, बंधक समस्या, एंटी टेरर ऑपरेशन और दुश्मन को तबाह करने जैसे मुश्किल कार्य आते हैं।

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गरुड़ कमांडो

 

गरुड़ कमांडो फोर्स

गरुड़ कमांडो फोर्स

वायुसेना का ही एक हिस्सा ‘गरुड़ कमांडो फोर्स’ देश की सबसे अत्याधुनिक और प्रशिक्षित कमांडो फोर्स है। अभी हाल में इसमें मात्र 2000 कमांडो हैं। अत्याधुनिक हथियारों से लैस इस फोर्स को हवाई क्षेत्र में हमला करने, दुश्मन की टोह लेने, हवाई अटैक करने, रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए खास तौर पर तैयार किए जाते हैं।

 

राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)

 

एनएसजी

एनएसजी कमांडोज

सर्वश्रेष्ठ कमांडोज की बात की जाए तो राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) का भी नाम आता है। एनएसजी कमांडो को हर दिन कड़ा अभ्यास करना पड़ता है। एनएसजी का इस्तेमाल विशेष परिस्थितियों में आतंकवादी गतिविधियों को निष्क्रिय करने जैसे कामों में इस्तेमाल किया जाता है। इनकी सबसे बड़ी खूबी ये है कि इन्हें खुद से ज्यादा अपने साथी पर विश्वास होता है क्योंकि आतंकियों को कवर करने के लिए एक दूसरे का साथ सबसे ज्यादा जरूरी है।

 

घातक फोर्स के जवान

 

घातक फोर्सेस

घातक फोर्सेस

इसके नाम से ही पता चलता है कि ये कितनी ‘घातक’ मानी जाती होगी। यह भी भारतीय सेना का ही एक हिस्सा है। इनका सबसे ज्यादा उपयोग दुश्मन के साथ आमने-सामने वाली लड़ाई में किया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि घातक फोर्स के जवान इतने ताकतवर होते हैं कि एक-एक जवान 20 लोगों पर भारी पड़ सकता है। और इन सब की ट्रेनिंग पैरा कमांडोज़ सैनिकों की तर्ज पर ही की जाती है। आमने-सामने की जंग में ये बटालियन के आगे चलकर दुश्मन का सामना करती है।

 

कोबरा कमांडो

 

सीआरपीएफ

कोबरा कमांडो (फाइल फोटो)

कोबरा कमांडो भारत की सबसे बेहतरीन फोर्सेस में से एक है। कोबरा फोर्स केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की स्पेशल फोर्स है। इन्हें भेष बदलकर दुश्मन पर हमला करने की खास ट्रेनिंग दी जाती है। इसके लिए इन्हें स्पेशल ‘गोरिल्ला ट्रेनिंग’ दी जाती है। यह घात लगाकर मारने में भी एक्सपर्ट होते है। इन्हें नक्सलियो से लड़ने के लिए भी भेजा जाता है। कोबरा फ़ोर्स के कारनामे हमेशा गुप्त ही रहते है।

 

पंजाब के कमांडो फोर्स

 

पंजाब के कमांडो फोर्सेस

पंजाब के कमांडो फोर्सेस

पंजाब के कमांडो फोर्स की जितनी तारीफ की जाएं उतनी ही कम है। भारत में सबसे ज्यादा 10 हजार आंतकियों को मारने का गौरव अगर किसी को प्राप्त है तो वह इन्हें ही मिला है। इनका सबसे ज्यादा सामना आतंकवाद से ही हुआ है।जानकारी के लिए बता दें कि पठानकोट हमलें में भी इन्ही कमांडो फोर्स ने अपना दमखम दिखाया था।

 

केरल कमांडो पुलिस

 

केरल कमांडो पुलिस

केरल कमांडो

कहा जाए तो केरल काफी शिक्षित एरिया है लेकिन यहां कई गांवो में नक्सलियों का आतंक छाया हुआ है। इन गांवो की रक्षा करने और यहां के आतंकवाद को खत्म करने की चुनौती से बखूबी लड़ना जानते हैं केरल कमांडो पुलिस। ये जानकर हैरानी होगी कि इन कमांडोज को कई बार पानी भी नसीब नही होता है क्योंकि केरल के ज्यादातर जंगलों पर नक्सलियों का कब्जा है। यहां के कमांडों के लिए सबसे चुनौती भरा कार्य है यहां के जंगलों में गश्त करना। क्योंकि नक्सली सिर्फ पत्तों की आवाज से ही गोलियां चलाना शुरू कर देते है। ऐसे में इन सब हालातों से बचने के लिए इन कमांडो की स्पेशल ट्रेनिंग भी होती है।

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