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राज्य पुलिस फोर्स में महिलाओं को मिलेगा 33 प्रतिशत आरक्षण : राजनाथ

गुजरात की महिला पुलिस फ़ोर्स

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महिला सशक्तीकरण की दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए राज्य सरकारों से पुलिस बलों में 33 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने को कहा है। इस सम्बन्ध में राज्यों को एडवाइजरी जारी की चुकी है। यह जानकारी केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कल दी।





लोकसभा में गृहमंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, “मैंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पुलिस में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने के बारे में लिखा है। राज्य सरकारों ने एडवाइजरी पर संज्ञान लेते हुए इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है।

निर्भया फंड के तहत लगभग 40500 कर्मियों को खासतौर पर महिला सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा

उन्होंने यह भी कहा कि 2011 में दिल्ली में हुए घ्रणित दुष्कर्म काण्ड के बाद बनाए गए निर्भया फंड के तहत लगभग 40500 कर्मियों को खासतौर पर महिला और साइबर सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। राजनाथ ने कहा कि निर्भया फंड के तहत दो प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जा चुकी है और अगले दो साल में 60 काउंसिलर्स को इस काम में लगाया जाएगा। बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार पर आतंरिक सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण जैसे प्रमुख कार्यक्रमों के फंड में कटौती करने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ लड़ाई कमजोर होगी।

छात्र-पुलिस कैडेट योजना

गृह मंत्री ने विपक्षी दलील को खारिज करते हुए कहा कि सरकार कुछ महीनों में छात्र-पुलिस कैडेट योजना तैयार करेगी जिसके लिए एक कार्य योजना तैयार की गई है। विद्यार्थी पुलिस कैडेट प्रोजेक्ट एक ऐसी स्कूल आधारित युवा विकास पहल है जो छात्रों को कानून, अनुशासन, नागरिक भावना का सम्मान करते हुए और सामाजिक बुराइयों से लड़ते हुए भावी नेताओं के रूप में विकसित करने में मदद करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण देता है।

कश्मीर में कानून और व्यवस्था की स्थिति में सुधार के लिए कई उपाय किए जा रहे

कश्मीर में पिछले साल की अशांति के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था की स्थिति में सुधार के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। पिछले वर्ष जनवरी में हुए पठानकोट आतंकवादी हमले का हवाला देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि केंद्र ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया और जांच काफी आगे तक पहुँच चुकी है। आतंकवाद के मोर्चे पर उन्होंने कहा कि 2011 में 99 आतंकवादी मारे गए थे, 2016 में यह संख्या बढ़कर 222 हो गई।

श्री सिंह ने कहा कि 2011 में 394 के मुकाबले पिछले साल 1442 आतंकियों ने आत्मसमर्पण किया। आतंक और नक्सली हिंसा में सुरक्षा बलों द्वारा पीड़ित हताहतों के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार उनके परिजनों को सहायता दे रही है, इस संबंध में मदद के लिए निगमों से भी संपर्क किया जा रहा है।

उन्होंने फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार का जिक्र किया जिन्होंने सुकमा के माओवादी हमले में मारे गए सीआरपीएफ के 12 जवानों के परिजनों को 9-9 लाख रूपये की मदद का ऐलान किया है। इसके अलावा बैडमिन्टन खिलाड़ी सायना नेहवाल भी आर्थिक मदद के लिए आगे आई हैं।

माओवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 106 से घटकर 68 हुई 

वामपंथी अतिवाद पर श्री सिंह ने कहा कि माओवाद से प्रभावित क्षेत्रों में कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि माओवाद से प्रभावित जिलों की संख्या 106 से घटकर 68 हो गई है, जबकि आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र जैसे सात राज्यों में 35 सबसे अधिक प्रभावित हैं। गृह मंत्री ने कहा कि उनकी संख्या कम हो रही है और आगे कम हो जाएगी। यह जानकारी देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए राज्यों को वित्तीय सहायता के साथ सुरक्षा बल और खुफिया सहायता भी शामिल है।

भारतीय सेना और महिलाएं : कुछ तथ्य

भारतीय सेना में महिला अधिकारियों की भर्ती 1992 में शुरू की गई, तब 50 रिक्तियों के लिए 1803 महिलाओं ने आवेदन किया था। वर्ष 2005 में एक रिक्ति के लिए औसतन 150 आवेदन प्राप्त हुए थे। 2010 में सेना में 93 महिला अधिकारी शामिल की गईं और 2011 में यह संख्या 166 थी।

फिलहाल सेना में महिलाओं की सबसे ज्यादा संख्या (20%) अमेरिका में है। उसके बाद फ्रांस में महिलाओं की संख्या है जो 15 फीसदी है। भारतीय सेना में महिलाओं की भागीदारी मात्र 5 फीसदी है और उन्हें काम्बेट यूनिट में तैनाती दी जाती है। सेना में महिलाओं की कम हिस्सेदारी का एक कारण यह भी माना जाता है कि महिलाएं जल्द ही सेना छोड़ देती हैं।

केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की स्थिति बेहतर

सेना के मुकाबले केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में महिलाओं की स्थिति बेहतर है। सीआरपीएफ में 5928, सीआईएसएफ में 5896, बीएसएफ में 2640, एसएसबी में 1166 और आईटीबीपी में 1091 महिलाएं हैं। सीआरपीएफ की तो तीन महिला बटालियन ही हैं। 2013 में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा था कि पुलिस बलों में महिलाओं की 33 फीसदी नुमायंदगी होनी चाहिए।

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