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कहां से आई ‘बीटिंग द रिट्रीट’ की परंपरा ? जानें इसके इतिहास से जुड़ी 9 खास बातें

हर वर्ष गणतंत्र दिवस समारोह के बाद होने वाली ‘बीटिंग द रिट्रीट’ हर देशवासी का मन मोह लेती है। परेड के बाद समापन के रूप में बीटिंग रिट्रीट एक ऐसा अवसर होता है जब देश का हर नागरिक रोमांचित हो उठता है। राजपथ के विजय चौक पर होने वाली बीटिंग रिट्रीट में भारतीय सेना के तीनों अंगों के मिलिट्री बैंड एक साथ भारत के राष्ट्रपति को सलामी देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि आखिर यह बीटिंग रिट्रीट होती क्या है ? यदि नहीं, तो हम आपको बता दें कि ‘बीटिंग द रिट्रीट’ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह के समापन का सूचक है। इससे जुड़ी और भी ढेरों जानकारियों के लिए क्लिक कीजिये अगली स्लाइड्स पर : –





सेना की बैरक वापसी का प्रतीक

‘बीटिंग द रिट्रीट’ भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का सूचक है। इस कार्यक्रम में थल सेना, वायु सेना और नौसेना के बैंड पारंपरिक धुन के साथ मार्च करते हैं। यह सेनाओं की बैरक वापसी का प्रतीक भी है। गणतंत्र दिवस के पश्चात हर वर्ष 29 जनवरी को शाम के समय ‘विजय चौक’ पर ‘बीटिंग द रिट्रीट’ कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।

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