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हाफिज को पकड़ने के लिये अमेरिका ने दोहराया 50 लाख डॉलर का इनाम

हाफिज सईद

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से लेकर देश के आम आदमी ने दस साल पहले मुम्बई पर हुए उन भयावह दिनों को याद किया जब पाकिस्तानी सेना द्वारा भेजे गए दस आतंकवादियों ने निहत्थे लोगों पर कायराना हमला किया और 166 निर्दोष लोगों की जान ले ली।





आतंकवादी हमले के मुख्य मास्टरमाइंड हाफिज सईद सहित अन्य सभी षडयंत्रकारियों को  गिरफ्तार करने के लिये अमेरिका ने 50 लाख डालर इनाम देने का अपना पुराना प्रस्ताव दुहराया है। अमेरिका ने फिर कहा है कि अमेरिका दोषी लोगो को दंडित करवाने के लिये प्रतिबद्ध है। भारत ने कहा है कि 26/11 के आतंकवादी हमले की साजिश पाकिस्तान की सरजमीं में रची गई थी और वहीं से इसका संचालन भी किया गया।

26 नवम्बर, 2008 को मुम्बई पर हुए आतंकवादी हमले के एक दशक बाद  शिकार हुए लोगों के परिवारजन और पूरा देश इनसाफ मांग रहा है लेकिन दोषी लोगों को सजा दिलाने की  बात तो दुर भारत के खिलाफ आतंकवादी साजिशें करवाने में जुटा हुआ है।  पाकिस्तान में 26/11 के षड्यंत्रकारी लोग खुलेआम घूम रहे हैं।

दोषी लोगों को सजा नहीं दिलवाने पर भारत ने गहरा रोष जाहिर करते हुए कहा है कि 10 साल बाद भी दोषी लोगों को सजा दिलवाने में पाकिस्तान रत्ती भर भी गम्भीरता नहीं दिखा रहा है।

इस हमले में छह अमेरिकी नागिरक भी मारे गए थे इसलिये अमेरिकी विदेश मंत्री पोम्पियो और यहां अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने बयान जारी कर भारत से सहानुभूति जाहिर की है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपने बयान में कहा- यह पीड़ितों के परिवारों के लिए एक अपमान है कि जिन लोगों ने मुंबई हमले की योजना बनाई थी उन्हें 10 वर्षों के बाद अभी भी हमले में संलिप्तता के लिए दोषी नहीं ठहराया गया है। हम लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगियों सहित इस अत्याचार के लिए जिम्मेदार आतंकवादियों के खिलाफ प्रतिबंधों को लागू करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रति उनके दायित्व के लिए सभी देशों विशेष रूप से पाकिस्तान का आवाहन करते हैं। भारत ने अमेरिका के इस कथन का स्वागत किया है कि 26/11 के दोषी लोगों को सजा दिलवाने के लिये पाकिस्तान सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को लागू करे।

इधऱ भारतीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने अपने बयानों में मारे गए लोगों के परिवारजनों से अपनी एकजुटता दिखाई है। इस हमले में भारत, अमेरिका सहित 14 देशों के 166 नागरिक मारे गए थे।

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