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स्पेशल रिपोर्ट: …तो सेना की अंगुलियों पर नाचेंगे ‘प्रधानमंत्री’ इमरान खान!

इमरान खान
इमरान खान और पाक आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा

नई दिल्ली। पाकिस्तानी आम चुनावों के अपेक्षित नतीजे सामने आ चुके हैं और इनमें पूर्व क्रिकेटर इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इनसाफ सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। इसलिये इमरान खान का पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनना लगभग तय है।





जेहादी तंजीमों के पिट्ठू माने जाने वाले तालिबान खान के नाम से विख्यात इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से कई शंकाएं पैदा होती हैं। उनके सत्ता में आने के बाद जेहादी आतंकवादी संगठनों को अपना एक नुमाइंदा पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम की कुर्सी पर बैठा होगा तो उन्हें भारत और अफगानिस्तान को लेकर अपना एजेंडा चलाने में आसानी होगी। इसमें पाकिस्तानी सेना का भी भरपूर साथ उन्हें मिलेगा और ऐसा माना जा रहा है कि वह पूरी तरह पाकिस्तानी सेना और जेहादी तंजीमों की चंगुल में फंसे रहेंगे।

पाक सेना के नुमाइंदे के तौर पर इमरान खान के पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने से पाकिस्तान की भारत नीति में बदलाव आने की उम्मीद नहीं लग रही। लेकिन इमरान खान प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जरूर भारत के साथ दोस्ती की कसमें खाएंगे और सार्थक बातचीत करने का वादा करेंगे । आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान को उबारने के लिये उन्हें अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह बताना होगा कि वह अपने मुल्क और आसपास शांति का माहौल चाहते हैं।

यह शुरू से ही साफ था कि इमरान खान पाकिस्तानी सेना के नुमाइंदे के तौर पर पाकिस्तानी एसेम्बली चुनाव में उतारे गए थे और इसके लिये पाकिस्तानी सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। इमरान को जिताने में मिली कामयाबी के बाद पाकिस्तानी सेना अपनी रणनीति के अनुरूप पाकिस्तान की विदेश व रक्षा नीति का संचालन कर सकेगी। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इसमें आड़े आ रहे थे इसलिये पाक सेना ने उन्हें सत्ता से बेदखल करवा कर जेल की सलाखों में भेज दिया है।

पाक सेना के लिये सबसे अहम भारत नीति है और वह यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि भारत के साथ दोस्ती उसकी शर्तों पर ही तय हो। जम्मू-कश्मीर में विद्रोह की चिंगारी को आग में बदलने में मिली कामयाबी के बाद पाकिस्तानी सेना इस फिराक में रहेगी कि इसे बुझने न दे। पाकिस्तानी सेना की इसी रणनीति की वजह से भारत में राष्ट्रवादी कही जाने वाली नरेन्द्र मोदी सरकार भी कड़ा रुख अपनाएगी।

इसलिये यहां राजनयिक हलकों में माना जा रहा है कि इमरान खान के सत्ता में बैठने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव का माहौल बना रहेगा। हो सकता है कि वार्ता बहाली की कुछ शुरुआती सुगबुगाहट हो औऱ इमरान खान को प्रधानमंत्री मोदी के बधाई संदेश में जो शुभकामनाएं दी जाएंगी उसमें दोस्त की तरह रहने का वादा किया जाए। इमरान खान के भारत विरोधी चुनावी भाषणों में जिन मुहावरों का इस्तेमाल किया गया उससे लगता है कि इमरान खान भारत को लेकर अपना तेवर जल्दी नहीं बदल सकेंगे। पाकिस्तान का आतंकवादी तबका और सेना को नजरअंदाज कर वह स्वतंत्र तौर पर भारत के साथ बातचीत को कोई नई दिशा नहीं दे सकेंगे।

भारत में भी अगले साल आम चुनाव होने वाले हैं इसलिये प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान के साथ नरमी का कोई रुख नहीं अपना सकते। पाकिस्तान के चुनावी नतीजे भारत के लिये किसी भी तरह राहत नहीं देने वाले हैं। खुद पाकिस्तान का नागरिक समाज भी इमरान के जीतने से आश्वस्त नहीं है कि पाकिस्तान अब शांति औऱ विकास के नये दौर में प्रवेश करेगा। इमरान खान के चुनावी नतीजों के आने के बाद चारों तरफ धांधली के जो आरोप लगाए गए हैं उसके मद्देनजर इमरान को एक स्थिर सरकार देने में मुश्किलें पैदा होंगी। पाकिस्तानी सेना इसी का फायदा उठाएगी और अपने हिसाब से इमरान को अपनी अंगुलियों पर नचाएगी।

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