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चुनौतियों के पहाड़ों को काट अब शिखर छू रही है हरियाणा पुलिस की यह अधिकारी 

नई दिल्ली। इंडोनेशिया के पश्चिम पापुआन प्रान्त में सुदिर्मन पर्वत की श्रृंखला के कारस्टेंस पिरामिड शिखर पर भारतीय ध्वज फहराने के बाद हरियाणा की बेटी और पुलिस अधिकारी अनीता कुंडू सोमवार को भारत लौट आई। दिल्ली हवाई अड्डे पर हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के युवाओं ने अनीता का स्वागत किया।





मीडिया के साथ अपने अनुभव बांटते हुए अनीता ने बताया कि सफर हालांकि मुश्किल था लेकिन जब आप कुछ कर गुजरने की ठान लेते हैं तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं पाती। उन्होंने बताया कि यह चोटी पर्वतारोहण के लिए सबसे दुर्गम चोटियों में से एक है। मच्छरों और मक्खियों की भरमार के कारण उनके 6 साथी बीमार भी हो गए। ऊंचाई पर ऑक्सीजन का स्तर कम होने से हमेशा जान का जोखिम बना रहता है लेकिन इनसानी हौंसलों के सामने शिखर भी छोटे पड जाते हैं।

अनीता ने कहा कि लड़कियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और उन्हें प्रोत्साहन देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैं एक लड़की हूं और दो बार एवरेस्ट फतह कर चुकी हूं। उन्होंने कहा कि लड़कियों को आगे बढ़ाने के लिए सोच बदलने की जरूरत है।

अनीता ने इस अवसर पर अपने जीवन के संघर्ष के बारे में भी बताया कि कैसे तमाम बाधाओं को पार कर यहां तक पहुंची हैं। एवरेस्ट और इंडोनेशिया की चोटी फतह कर चुकी अनीता अब शेष पांच महाद्वीपों की चोटियों को फतह करने के अपने मिशन को पूरा करने निकलेंगी।

अनिता कुंडू के जीवन में पहाड़ जैसी चुनौतियां रही हैं। वह बॉक्सर बनना चाहती थी। जब उनके पिता ईश्वर कुंडू का एक दुर्धटना में निधन हुआ तो अनिता महज 13 वर्ष की थी। बॉक्सर बनने के सपने को पीछे छोड़ अनिता ने मां के साथ खेतीबाड़ी संभाली। वर्ष 2008 में हरियाणा पुलिस में भर्ती हो गई। वर्ष 2013 नेपाल की तरफ से अनिता ने माउंट एवरेस्ट की चोटी फतह की तो हरियाणा सरकार ने उन्हें सब इंस्पेक्टर बना दिया।

अनीता के इस अभियान को सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेस प्रायोजित कर रहा है। सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेस के संस्थापक और राज्यसभा सदस्य आर.के. सिन्हा ने इस अवसर पर कहा कि अनीता से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

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