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यहां मिलता है जवानों को नया जीवन, ‘आर्मी मेडिकल कोर’ से जुड़ी 10 रोचक बातें

जहां एक ओर दुनिया सैनिकों को ‘लौह पुरुष’ के रूप में देखा जाता है वहीं दूसरी ओर वे आम लोगों की तरह ही बीमार पड़ते हैं। युद्धभूमि में घायल होते हैं लेकिन सेना के चिकित्सक उन्हें नया और स्वस्थ जीवन देते हैं और उन्हें फिर से उठ खड़े होने के लिए तैयार करते हैं। क्योंकि केवल एक चुस्त-दुरुस्त सिपाही ही जमीन पर, आकाश में अथवा समुद्र में अगले दिन युद्ध करने के लिए जीवित रह सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं सेना चिकित्सा कोर से जुड़ी कुछ खास बातें –





ईस्ट इंडिया कंपनी ने की थी शुरुआत

सबसे पहले ईस्ट इंडिया कंपनी ने सन् 1745 में अपने सैनिकों के लिए मिलिट्री सर्जनों को नौकरी पर रखना शुरू किया था। भारत में चिकित्सा सेवाओं की शुरुआत सन् 1764 में हुई और बंगाल चिकित्सा सेवा की स्थापना की गई। इसके बाद मद्रास और बंबई चिकित्सा सेवाएं सन् 1767 और 1779 में शुरू हुई। वे सभी क्रमश बंगाल, मद्रास और बंबई की तीन प्रेसीडेंसी सेनाओं को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराती थीं।

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