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स्पेशल रिपोर्ट: रवांडा में मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग एक साथ क्यों ?

पीएम मोदी

नई दिल्ली। यह महज संयोग नहीं है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिन फिंग कुछ समय के अंतराल पर रवांडा पहुंचे और वहां के सैन्य बलों को मजबूत करने की पेशकश की। रवांडा के बहाने दोनों देश अफ्रीका के इलाकों पर अपना सामरिक दबदबा बढ़ाना चाहते हैं और इसी इरादे से दोनों देशों ने रवांडा की सेना को अपने तरीके से मदद करने के समझौते किये हैं।





पिछले साल जनवरी में पूर्व अफ्रीकी देश रवांडा के राष्ट्रपति जब भारत आए थे तब आपसी राजनयिक रिश्तों का स्तर बढ़ाकर सामरिक साझेदारी का कर दिया गया था और इस सप्ताह जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रवांडा का दौरा किया तो वहां की सेनाओं को ताकतवर बनाने के लिये व्यापक ढांचे वाला एक रक्षा समझौता सम्पन्न किया।

प्रधानमंत्री मोदी दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर बैठक में भाग लेने के पहले दो अफ्रीकी देशों रवांडा और उगांडा के दौरे पर भी गए। चीन के राष्ट्रपति भी ब्रिक्स शिखर बैठक में भाग लेने के बहाने रवांडा पहुंचे। अपने पहले पड़ाव में प्रधानमंत्री मोदी ने आपसी रिश्तों को गहरा बनाने के लिये रक्षा व व्यापार सहित आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किये जिसमें रक्षा समझौता सबसे अहम है। दोनों देश अब नई सामरिक साझेदारी के रिश्तों के अनुरूप रक्षा क्षेत्र में रिश्तों को गहरा करेंगे तो वहां भारत का सामरिक दबदबा भी बढ़ेगा।

अफ्रीकी देश तेजी से गरीबी के दौर से बाहर निकल रहे हैं और वहां का बाजार तेजी से उभर रहा है इसलिये अफ्रीकी देशों के साथ आर्थिक रिश्ते गहरे करने के लिये भारत गत एक दशक से ही इंडिया अफ्रीका फोरम की शिखर बैठकें करते रहा है। अब इसी कड़ी को गहराई देने के लिये प्रधानमंत्री मोदी खुद ब्रिक्स बैठक में जाने के बहाने रवांडा और उगांडा पहुंचे और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने वाले पिछले समझौतों के साथ रक्षा समझौता को भी सम्पन्न किया। रवांडा जाने वाले वह भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं।

रवांडा की सेना को भारत पहले ही अपने सैन्य प्रतिष्ठानों में ट्रेनिंग देता रहा है लेकिन अब दोनों देशों के बीच रक्षा समझौते को संस्थागत रुप दिया जाएगा। रवांडा के मौजूदा दौरे में प्रधानमंत्री मोदी ने रक्षा क्षेत्र में रवांडा को ताकतवर बनाने के लिये रक्षा सहयोग समझौता किया जिसके तहत भारत रवांडा की सेना की क्षमता मजबूत करने में मदद करेगा। रवांडा की सेना को रक्षा उद्योग में भी भारत मदद करेगा। रवांडा भारत से रक्षा साज सामान भी आयात करेगा।

इंडियन टेक्निकल एंड इकोनोमाकि कोआपरेशन इनीशिएटिव (आईइटेक ) के तहत भारत रवांडा के सैन्य बलों को ट्रेनिंग दे रहा है जिसकी सराहना रवांडा के राष्ट्रपति पाल कगामे ने की।

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