Featured

स्पेशल रिपोर्ट: अमेरिका से टू प्लस टू वार्ता अब 6 सितम्बर को

भारत-अमेरिका का झंडा

नई दिल्ली। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के तहत भारत और अमेरिका के सामरिक रिश्तों की भावी दिशा तय करने वाली टू प्लस टू की अहम वार्ता अब छह सितम्बर को नई दिल्ली में होगी। पिछली स्थगित वार्ता छह जुलाई को वाशिंगटन में होने वाली थी जो अमेरिका और उत्तर कोरिया के रिश्तों में आए नये मोड़ के मद्देनजर स्थगित कर दी गई थी।





तब अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को फोन कर वार्ता स्थगित करने पर खेद जाहिर करते हुए टू प्लस टू डायलाग को भारत में ही भारतीय नेताओं की सुविधा से तय करने की पेशकश की थी। इसी के तहत अब दोनों देशों ने टू प्लस टू डायलाग की अगली तिथि छह सितम्बर को घोषित की है।

दोनों देशों के रक्षा व विदेश मंत्रियों की साझा वार्ता का ढांचा पिछले साल 25 जून को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वाशिगंटन दौरे में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ हुई शिखर बैठक के दौरान तय किया गया था।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस की भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के बीच एक टेबल पर होने वाली वार्ता में आपसी विवाद के कई मसलों पर दो टूक बातचीत होने वाली है। इस साझा बैठक के बारे में यहां विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस दौरान आपसी हितों के वैश्विक,  क्षेत्रीय और आपसी मसलों पर बातचीत होगी ताकि आपसी सामरिक और सुरक्षा सम्बन्धों को मजबूत किया जा सके।

पिछले महीनों में आपसी,  क्षेत्रीय और वैश्विक मसलों को लेकर भारत के नजरिये से अमेरिका के रुख में आये बदलाव से भारत के सामरिक हलकों में चिंता पैदा हुई है। जहां रूस और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से भारत के दीर्धकालिक सामरिक हितों को चोट पहुंच रही है वहीं अफगानिस्तान में तालिबान को लेकर अमेरिका के नरम हुए रुख से भारत में चिंता है। यहां राजनयिक पर्यवेक्षकों के मुताबिक इन मुद्दों पर यदि अमेरिका का नया रुख जारी रहा तो भारत के लिये चिंता की बात होगी। अमेरिका का यह रुख भारत के लिये नई सामरिक चुनौतियां पेश करेगा।

जहां अमेरिका ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत को साझेदार बताते हुए इसकी शांति व स्थिरता के लिये साझा रणनीति बनाने पर जोर दिया है लेकिन भारत ने इसमें शुरुआती उत्साह दिखाने के बाद सतर्क रुख अपनाना शुरू किया है।

अमेरिका से रक्षा साज सामान हासिल करने के लिये अमेरिकी कानूनों को मानने की शर्त भी अमेरिका से रक्षा रिश्ते गहरे करने में अड़चन साबित हो रही है। अमेरिका ने भारत से कहा है कि अमेरिका से जो भी शस्त्र प्रणालियां भारत को निर्यात की जाएंगी उनका औचक निरीक्षण कोमकासा कानून के तहत करने का अधिकारी होगा। अमेरिका ने कोमकासा कानून को भारत से स्वीकार करने को कहा है। इसे लेकर दोनों पक्षों के आला अधिकारियों के बीच बातचीत चल रही है और उम्मीद है कि छह सितम्बर को होने वाली टू प्लस टू वार्ता के दौरान कोमकासा कानून को लेकर कोई सहमति बन जाए। अमेरिका भी इस तरह की शर्तों से अमेरिका भारतीय रक्षा बाजार से हाथ धो सकता है।

 

Comments

Most Popular

To Top