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Special Report: सीमा पर सबसे खूनी रहा यह साल

भारतीय सेना

नई दिल्ली। भारत औऱ पाकिस्तान के बीच इस साल जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा औऱ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी और संघर्ष विराम की वारदतों में भारी इजाफा हुआ है। इस साल अब तक सैनिकों और नागरिकों की सबसे अधिक मौतें हुई हैं जिससे यह साल अब तक का सबसे खूनी कहा जा सकता है।





हालांकि गत 29 मई को दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष विराम समझौते को लागू करने का ऐलान हुआ था लेकिन इस साल जुलाई तक इन वारदातों में पिछले तीन सालों के मुकाबले भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

इस बारे में रक्षा राज्य मंत्री सुभाष भामरे ने संसद में जानकारी दी है कि 2018 में 23 जुलाई तक नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम उल्लंघन की 942 वारदातें हुई हैं जब कि 2017 में 860 और 2016 में 228 वारदातें हुई थीं। 2015 में ये वारदातें औऱ भी कम यानी 152 के स्तर पर थीं।

दूसरी ओऱ अंतरराष्ट्रीय सीमा पर गोलाबारी की घटनाएं भी इस साल जून तक असाधारण तौर पर सबसे अधिक यानी 490 रहीं जब कि पिछले साल 111 वारदातें हुई थीं। 2016 में ये घटनाएं 221 और 2015 में 253 रही थीं।

मौजूदा साल औऱ पिछले तीन सालों के दौरान संघर्ष विराम उल्लंघनों के दौरान हुई मौतों के बारे में रक्षा राज्य मंत्री ने बताया कि 2018 में 23 जुलाई तक 15 सैनिक शहीद हो गए थे। 2017 में इनकी संख्या 15, 2016 में 8 और 2015 में छह रही थीं। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के 12 जवान शहीद हुए जबकि 2017 में चार , 2016 में पांच और 2015 में चार जवान शहीद हुए। जहां तक गोलाबारी में नागरिकों की मौत का सवाल है यह साल उनके लिये भी काफी खऱाब रहा। 2018 में अबतक 28 नागरिक मारे जा चुके हैं, जबकि 2017 में 12, 2016 में 13 और 2015 में 16 नागरिक शहीद हुए थे।

संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं के दौरान मारे गए लोगों को इस साल अब तक 35 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई है जबकि पिछले साल 35 लाख, 2016 में 35 लाख और 2015 में 15 लाख रुपये की राशि दी गई थी।

 

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