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Special Report: बुलेट प्रूफ जैकेटों के मानक तय, जवानों को मिलेंगे अब मजबूत जैकेट

स्वदेशी अत्याधुनिक बुलेट प्रूफ जैकेट
प्रतीकात्मक फोटो

नई  दिल्ली। सैन्य, अर्ध सैन्य और पुलिस बलों के लिये छोटे हथियारों  की बुलेटों  से बचाव के लिये  बनाए जाने वाले बुलेट रोधक जैकेट (बुलेट रेजिस्टेंट जैकेट) के लिये पहली बार भारतीय मानक ( इंडियन स्टैंडर्ड) जारी किया गया है।





यह मानक ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड़्स ( BIS) और  वाणिज्य संगठन ( फिक्की ) की यहां हुई एक बैठक में जारी किया गया।

इस मानक  को  वस्त्र विभाग परिषद( TDC)  द्वारा मंजूर टेक्सटाइल  प्रोटेक्टिव क्लोथिंग सेक्शनल कमेटी  द्वारा अंतिम रुप दिया गया जिसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स ने स्वीकार कर लिया। बुलेट रेजिस्टेंट जैकेटों की न्यूनतम मानक जरूरतों का पैमाना तय करने में यह कदम मील का पत्थऱ साबित होगा। इसका लाभ यह होगा कि सुरक्षा जवानों को न्यूनतम स्वीकार्य मानक वाले बुलेट प्रूफ जैकेट मुहैया कराए जाएं। यह मानक भारतीय जरूरतों के अनुरूप तय किया गया है। इसका नतीजा यह होगा कि सुरक्षा ड्यूटी में लगे भारतीय जवान हमलावरों की गोलियों से कम से कम हताहत होंगे।

भारत सरकार के  प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर विजय के. राघवन ने इस मौके पर कहा कि  यह मानक बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने वाली कम्पनियों की चिंताओं को दूर करेगा। इससे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)  और अन्य  टेस्टिंग प्रयोगशालाओं  को तय प्रक्रियांओं के मुताबिक मानक का परीक्षण करने में आसानी होगी।

 उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक मानकों के मुताबिक चुनोती यह थी कि बुलेट प्रूफ जैकेटों का वजन  10.5 किलो से घटाकर छह किलो किस तरह किया जाए।

बीआईएस की महानिदेशक सुरीना रंजन ने कहा कि बुलेट रोधी जैकेटों का मानक तय होने से सुरक्षा एजेंसियों दवारा तय मानकों के मुताबिक जैकेट हासिल करना आसान हो जाएगा।

डीआरडीओ के चेयरमैन और रक्षा शोध एवं उत्पादन विभाग के सचिव डॉ. जी. सतीश रेड्डी ने उम्मीद जाहिर की कि नया मानक एक अच्छी शुरुआत है और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इसे जल्द इस्तेमाल में लाएंगी। उन्होंने कहा कि अब अधिक निष्पक्ष और स्वतंत्र टेस्टिंग लैब की जरूरत देश में है।

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