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स्पेशल रिपोर्टः DEFEXPO 2018 में दिखेगी टैंक नाशक मिसाइलों की होड़

DefExpo- 2018
DEFEXPO- 2018 (सौजन्य- गुगल)

नई दिल्ली। 11 अप्रैल से चेन्नै में शुरु हो रही अंतरराष्ट्रीय रक्षा प्रदर्शनी डेफएक्सपो-2018 के दौरान थलसेना के लिये कंधे से छोड़ी जाने वाली टैंक नाशक मिसाइल को लेकर होड़ देखने को मिलेगी। जहां भारत ने इजराइल से स्पाइक टैंक नाशक मिसाइल का सौदा रद्द करने का ऐलान करने के बाद उस पर फिर से बातचीत शुरू कर दी है वहीं अमेरिका एक बार फिर अपनी जैवेलिन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल भारत को बेचने की कोशिश करेगा। अमेरिका ने कुछ साल पहले ही जैवेलिन मिसाइल भारतीय थलसेना को बेचने और इसकी तकनीक भारत को बताकर भारत में कारखाना लगाने में मदद की कोशिश की थी।





डेफएक्सपो-2018 के दौरान अमेरिकी लॉकहीड मार्टिन कम्पनी जैवेलिन मिसाइल की आकर्षक नुमाइश करेगी। इस मिसाइल को लेकर अपनी पेशकश दुहराने के लिये लॉकहीड मार्टिन कम्पनी के इंटरनैशनल बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर हेली दोनोहो डेएफएक्सपो के दौरान मौजूद रहेंगे।

अमेरिकी प्रशासन ने पेशकश की है कि वह जैवेलिन मिसाइल को अपने फारेन मिलिट्री सेल्स प्रोग्राम के तहत भारत को सप्लाई करने को तैयार है। एफएमएस प्रोग्राम के तहत सरकारी स्तर पर बातचीत होती है और हथियारों की वही लागत मांगी जाती है जिस पर अमेरिकी सेनाएं खरीदती हैं इसलिये इस सौदे में पारदर्शिता होती है।

लॉकहीड मार्टिन के एक प्रवक्ता ने यहां कहा कि जैवेलिन मिसाइल को कोई भी सैनिक अपने कंधे पर रख कर चला सकता है। इस तरह युद्ध के दौरान कोई सैनिक दुश्मन के भारी से भारी टैंक को ध्वस्त कर सकता है। जैवेलिन मिसाइल को चलाना काफी आसान होता है और कोई सैनिक पहली बार इसका इस्तेमाल कर रहा है तो भी उसकी सफलता दर 97 प्रतिशत होती है।

जैवेलिन मिसाइल अमेरिकी थलसेना के भंडार में 2050 तक मौजूद रहेगी और इस दौरान इसकी क्षमता खासकर इसके वजन को कम करते हुए इसमें कई तरह के सुधार भी होते रहेंगे जिसकी तकनीक भारत को भी बताई जाएगी।

अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिया है कि भारतीय थलसेना के पास टैंक नाशक मिसाइल की भारी कमी के संकट को देखते हुए वह भारत को इसकी त्वरित सप्लाई करवाएगा। यह मिसाइल लॉकहीड मार्टिन और रेथियान कम्पनी द्वारा साझा तौर पर विकसित और उत्पादित है। लॉकहीड मार्टिन ने पेशकश की है कि जैवेलिन मिसाइल का कारखाना भारत सरकार के मेड इन इंडिया कार्यक्रम के तहत भारत में लगाने को तैयार है। इस बारे में भारतीय रक्षा मंत्रालय के साथ कई दौर की बातचीत कुछ साल पहले ही हुई थी लेकिन सरकार ने इस पर फैसला टालकर इजराइल की कम्पनी से बातचीत शुरु कर दी और बाद में इजराइल से बातचीत भी अधऱ में लटक गई।

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