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Special Report: दक्षिण चीन सागर में शांति को खतरा- वियतनाम

साउथ चाइना सी
साउथ चाइना सी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। हिंद प्रशांत इलाके में शांति, सुरक्षा व स्थिरता को बढ़ती चुनौती के मद्देनजर यह इलाका दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यहां जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आयोजित एक सेमिनार को सम्बोधित करते हुए वियतनाम के राजदूत तोम सिन्ह थान्ह ने कहा कि इस इलाके में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात तेजी से बदल रहे हैं।





राजदूत ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में मौजूदा हालात शांति, स्थिरता और नौवहन की आजादी को सबसे बड़ा खतरा है। दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम द्वीपों के विकास की गतिविधियों को दुनिया देख रही है। इससे न केवल दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की सम्प्रभुता को खतरा पहुंचता है बल्कि इलाके के बाहर के देशों की समुद्री, वैमानिकी और व्यापारिक गतिविधियों को भी खतरा पहुंचता है।

इस अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय और भुवनेश्वर स्थित कलिंग हिंद प्रशांत अध्ययन संस्थान (केआईआईपीएस) द्वारा आयोजित किया गया था। जेएनयू के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने कहा कि भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय अहमियत की वजह से हिंद प्रशांत की अवधारणा का विकास हुआ है। जेएनयू के रेक्टर प्रोफेसर चिंतामणि महापात्र ने हिंद प्रशांत की अवधारणा बताई और कहा कि भारत को इस इलाके के भौगोलिक दायरे को पारिभाषित करने की जरूरत है और भारत की आर्थिक ताकत और राष्ट्रीय सुरक्षा और इलाके में शांति व सुरक्षा बनाए रखने की जरूरत के मद्देनजर अपने लक्ष्य और उद्देश्यों को बताने की जरूरत है।

वियतनाम के नजरिये से हिंद प्रशांत और दक्षिण चीन सागर के महत्व पर जोर देते हुए राजदूत थान्ह ने कहा कि उनके देश की न केवल होआंग सा (पारासल) और त्रुओंग सा शा (स्प्रातली) द्वीपों पर सम्प्रभुता है बल्कि तीन हजार अन्य द्वीपों पर भी उसका दावा है। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानूनों के तहत वियतनाम के अधिकार क्षेत्र में दस लाख वर्ग किलोमीटर विशेष आर्थिक क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर वियतनाम की अर्थव्यवस्था के लिये महत्व रखता है और यह दुनिया के लिये मुख्य प्रवेश द्वार है। इसलिये यदि पूर्व सागर पर कब्जा होता है तो न केवल वियतनाम की सुरक्षा को खतरा पहुंचेगा बल्कि इसकी अर्थव्यवस्था को भी गम्भीर नुकसान होगा।

इसके अलावा हिंद प्रशांत भी वियतनाम के लिये काफी अहमियत रखता है क्योंकि इसके सबसे बड़े सामरिक और आर्थिक साझेदार भी इसी इलाके में स्थित हैं। वियतनाम के राजदूत ने राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग के पिछले भारत दौरे में दिये गए भाषण की याद दिलाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने सभी देशों से कहा था कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक खुले इलाके के आधार पर सभी देशों को अपना नजरिया विकसित करना चाहिये। इस इलाके में शांति, स्थिरता और समावेशी समृद्धि को ध्यान में रखा जाना चाहिये।

राजदूत ने सभी देशों से यह भी कहा कि समुद्री आजादी और निर्बाध व्यापार की रक्षा के लिये सभी देशों को सामूहिक प्रयास करने चाहिये ताकि ताकतवर देशों की जोड़तोड़ की वजह से हिंद महासागर और प्रशांत महासागर उपक्षेत्रीय इलाकों में न बंट जाए। राजदूत थान्ह ने सभी देशों से यह आग्रह भी किया कि सागरीय इलाकों में शांति, स्थिरता और कानून का शासन स्थापित करने के लिये प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। ताकि झगड़े रोके जा सकें, सामूहिक सुरक्षा बनाई रखी जा सके और पारम्परिक और गैरपारम्परिक सुरक्षा खतरों से प्रभावी तरीकों से निबटा जा सके।

राजदूत ने कहा कि हिंद प्रशांत इलाके को लेकर वियतनाम का नजरिया भारत के नजरिए से काफी मिलता-जुलता है जिसकी व्याख्या सिंगापुर में शांगरीला डायलाग के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की थी। लेकिन सहयोगी कानूनों और भरोसे की कमी और अनसुलझे विवादों की वजह से क्षेत्रीय शांति व स्थिरता को गम्भीर खतरा पहुंच रहा है।

 

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