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स्पेशल रिपोर्ट: एस-400 मिसाइल चार साल के भीतर तैनात होगी

एस- 400 मिसाइल प्रणाली
एस-400 मिसाइल सिस्टम (फाइल फोटो)

नई दिल्ली।  दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों पर हमला करने वाली जिस एंटी मिसाइल प्रणाली को रूस से खरीदने पर बात चल रही है वह सौदा सम्पन्न होने के अढ़ाई से चार साल के भीतर तैनात कर दी जाएगी। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने यहां पत्रकारों से एक बातचीत में साफ किया कि  अमेरिका द्वारा इस मिसाइल को हासिल करने पर किये जा रहे एतराज को भारत नहीं मानेगा।





 रक्षा मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि उन्होंने अमेरिकी सांसदों औऱ अधिकारियों से साफ कहा है कि रूस के साथ रक्षा सम्बन्ध रखने वाले कैटसा कानून को भारत नहीं मानता है क्योंकि यह अमेरिकी कानून है भारत का नहीं। उन्होंने अमेरिकियों से यह भी कहा है कि रूस और भारत के रक्षा सम्बन्ध दशकों पुराने हैं और इसमें किसी तरह की अड़चन नहीं पैदा की जा सकती।

 रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस से इस मिसाइल को खरीदने के लिये कई सालों से बातचीत चल रही थी और अब यह सौदेबाजी के निर्णायक दौर में पहुंच गई है। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने कैटसा ( काउंटरिंग अमेरिकन एडर्वसर्रीज थ्रू सैंक्शंस एक्ट) पारित किया है जिसके जरिये वह सभी देशों को धमकी दे रहा है कि रूस से कोई रक्षा साज सामान खरीदा तो उस देश के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाएंगे।  लेकिन रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत द्वारा अपनी बात अमेरिकियों को बताए जाने के बाद वे भारत की स्थिति को समझने लगे हैं।

 एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली दुश्मन की किसी हमलावर बैलिस्टक मिसाइल को आसमान में ही करीब 250 किलोमीटर दूर तक  ध्वस्त कर सकती है। चीन और पाकिस्तान की बैलिस्टिक मिसाइलों को भारत के शहरों पर गिरने से रोकने के इरादे से एस-400 मिसाइल प्रणाली की खरीद का अहम फैसला लिया गया है। ऐसी पांच एंटी मिसाइल खरीदने पर बातचीत चल रही है जिस पर पौने छह अरब डालर की लागत आ सकती है।

 माना जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन के सितम्बर या अक्टूबर में आगामी भारत दौरे में एस-400 मिसाइल को खरीदने के सौदे पर दस्तखत हो सकते हैं।

   भारत को अमेरिकी सैन्य प्रणालियों को बेचने के  लिये  फाउंडेशन एग्रीमेंट कैमकासा  को जल्द सम्पन्न करने के लिये चल रही बातचीत की उन्होंने पुष्टि की लेकिन कहा कि यह भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित टू प्लस टू वार्ता से नहीं जुडी है।  उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका के रक्षा व विदेश मत्रियों के बीच टू प्लस टू वार्ता छह जुलाई को प्रस्तावित थी जिसे अमेरिकी आग्रह पर स्थगित कर दिया गया था।

पाचंवी पीढ़ी के लडाकू विमान एफजीएफए के रूस के साथ साझा विकास और उत्पादन के लिये चल रही बातचीत के बारे  में पूछे जाने पर रक्षा मंत्री ने कहा कि इस विमान के डिजाइन और विकास के पहले चरण में भारत ने भाग लिया। दूसरा चरण पूरा करने के बाद भारत ने रूसी अधिकारियो से कहा है कि वे इस विमान के  विकास में आगे कदम बढ़ा सकते हैं लेकिन भारत इसमें वक्त आने पर अपनी रुचि बताएगा। रक्षा मंत्री ने इस तरह साफ  संकेत दिया कि भारत एफजीएफए के साझा विकास और उत्पादन में अब और साथ नहीं रहेगा।

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