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Special Report: रूस ने एस-400 एंटी मिसाइल की मारक दूरी 400 किमी की

एस- 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम

नई दिल्ली। दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों का नाश करने वाली रूसी एंटी- मिसाइल एस-400 अब चार सौ किलोमीटर दूर तक मार कर सकेगी। इस मिसाइल की मौजूदा किस्म 250 किलोमीटर दूर आसमान में किसी हमलावर मिसाइल को गिराने की क्षमता रखती है।





उल्लेखनीय है कि भारत इस मिसाइल को रूस से खरीदने की सौदेबाजी कर रहा है। इस मिसाइल को रूस से हासिल करने पर सहमति दो साल पहले हुई थी। यह मिसाइल इसलिये खबरों में है कि अमेरिका ने भारत को आगाह किया है कि इसे खरीदा तो भारतीय प्रतिष्ठानों पर प्रतिबंध लग जाएंगे। अमेरिकी चेतावनी के मद्देनजर इस मिसाइल को हासिल करने के भारत के संकल्प के बारे में हाल में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि इस पर सौदेबाजी पर बातचीत अंतिम दौर में है। नवीनतम रिपोर्टों के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने इसे खरीदने की मंजूरी दे दी है और अब यह प्रस्ताव कैबिनेट मामलों की सुरक्षा समिति (सीसीएस) के समक्ष जाएगा।

यहां मिली रिपोर्टों के मुताबिक रूस ने एस-400 मिसाइलों की नवीनतम 440 किलोमीटर मारक दूरी वाली किस्म का नाम 40 एन-6- ई रखा है। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इस नवीनतम एंटी मिसाइल को निर्यात की अनुमति दी जाएगी या नहीं। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एस-400 की जिस किस्म पर सौदेबाजी की है वह 250 किलोमीटर मारक दूरी वाली है। तुर्की ने भी रूस को इसी किस्म वाली मिसाइल की सप्लाई का ठेका दिया है। रूसी समाचार एजेंसी तास के मुताबिक नई मिसाइल इस साल के अंत तक रूसी सेना में शामिल कर ली जाएगी।

प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक नई मिसाइल आसमान में 185 किलोमीटर की उंचाई पर आ रही किसी हमलावर मिसाइल को चार सौ किलोमीटर दूरी से गिरा सकेगी। यदि इस हमलावर मिसाइल पर परमाणु बम रखा गया हो तो वह आसमान में ही टकरा कर फट जाएगा और इसका जमीन पर मामूली असर ही होगा। रूस एस-400 की नई किस्म का विकास 2013 से ही कर रहा था। 2015 में रूस ने ऐलान किया था कि नई मिसाइल ने आसमान में लक्ष्य से टकराने में कामयाबी हासिल की है।

 

एस-400 एंटी मिसाइल प्रणाली को चीन ने भी अपने यहां तैनात किया है। भारत की ऐसी पांच एंटी मिसाइल करीब पौने सात अरब डालर से खरीदने की योजना है। ये एंटी मिसाइलें दिल्ली या मुम्बई जैसे शहरों की सुरक्षा के लिये तैनात की जाएंगी।

भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी पिछले डेढ़ दशक से एंटी मिसाइल के विकास में जुटा है औऱ इसके छह परीक्षण हो चुके हैं लेकिन अब तक इसे सेनाओं को सौंपने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को नहीं मिला है।

 

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