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स्पेशल रिपोर्ट: पुतिन-मोदी की टेलीफोन पर लंबी बात, हुई रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा

राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी
फाइल फोटो

नई दिल्ली। नया साल 2019 की शुभकामनाएं एक दूसरे को देने के बहाने रूस  के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन औऱ भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को टेलीफोन पर लम्बी बातचीत की और रक्षा सहयोग औऱ आतंकवाद जैसे आपसी हितों के दिवपक्षीय मसलों पर गहन चर्चा की।





अमेरिका द्वारा रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों की वजह से पैदा विवाद के मद्देनजर पुतिन-मोदी की टेलीफोन वार्ता को  यहां राजनयिक हलकों में काफी अहमियत दी जा रही है। गौरतलब है कि पिछले साल अमेरिका ने अपने  कैटसा कानून के जरिये  यह ऐलान किया कि रूस से जो भी देश सैनिक साज सामान खरीदेगा उस पर अमेरिका  आर्थिक प्रतिबंध लगा देगा। लेकिन भारत ने अमेरिका के इस फैसले  की परवाह नहीं की और रूस से एंटी मिसाइल प्रणाली एस- 400 खरीदने का ऐलान कर दिया। भारत ने रूस से ऐसी 05 मिसाइल नाशक प्रणाली करीब सवा पांच अरब डॉलर में खरीदने का समझौता किया।

रूस के साथ हुए इन अहम रक्षा सौदे के मद्देनजर रूसी राष्ट्रपति और भारतीय प्रधानमंत्री की टेलीफोन बातचीत के दौरान रक्षा सहयोग की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करना काफी अहम है।

गौरतलब है कि भारत औऱ रूस के बीच स्पेशल एंड प्रिवेलेज्ड पार्टनरशिप का रिश्ता है और इसी के अनुरूप रूस भारत को ऐसी संवेदनशील तकनीक वाले रक्षा साज सामान हासिल करने में भारत को मदद कर रहा है जो भारत को पश्चिमी देश कतई नहीं देंगे।

गौरतलब है कि पिछसे साल मई में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के सोची शहर का दौरा किया था औऱ  बाद में अक्टूबर में राष्ट्रपति पुतिन भारत आए। इन दौरों से  भारत और रूस के रिश्तों में गति बनी रही।

सोमवार की टेलीफोन वार्ता में दोनों राष्ट्रीय नेता इस बात पर सहमत हुए कि  वैश्विक बहुपक्षीय व्यवस्था में भारत और रूस के बीच सहयोग की विशेष भूमिका चल रही है।  गौरतलब है कि भारत, अमेरिका और जापान के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक के अलावा हिंद-प्रशांत समूह के चार देशों की क्वाड बैठक में भी भाग लेता रहा है। इसके मद्देनजर अमेरिका के प्रतिद्वंदी रूस के साथ भारत का विशेष रिश्ता बनाना काफी अहमियत रखता है।  भारत औऱ रूस संयुक्त राष्ट्र के अलावा शांघाई सहयोग संगठन  औऱ ब्रिक्स में भी अहम सहयोगी भूमिका निभा रहे हैं।

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