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स्पेशल रिपोर्ट: अरिहंत से छोड़ी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल, ऐसी क्षमता वाला भारत सिर्फ छठा देश

पनडुब्बी अरिहंत से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइल
पनडुब्बी अरिहंत से छोड़ी गई बैलिस्टिक मिसाइल (फाइल फोटो)

नई दिल्ली।  भारत की पहली स्वदेशी परमाणु पनडुब्बी अरिहंत को परमाणु मिसाइलों से लैस करने की दिशा में पहली बड़ी कामयाबी मिली है। करीब दस दिनों पहले अरिहंत परमाणु पनडुब्बी से विशाखापत्तनम में परमाणु हथियारों से लैस Submarine Launched Ballistic Missile (SLBM) का सफल परीक्षण किया गया। सरकारी तौर पर बी- 05 नाम की इस मिसाइल के परीक्षण का ऐलान नहीं किया गया है।





भारत इस तरह पहली बार व्यावहारिक मायने में दुनिया के ऐसे छह चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जो अपनी परमाणु पनडुब्बी से परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल छोड़ने की क्षमता रखते हैं। ऐसी क्षमता वाले पांच अन्य देश हैं- रूस, अमेरिका, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन। पनडुब्बी से छोड़ी जाने वाली भारत की बैलिस्टिक मिसाइल दस मीटर लम्बी है और 750 किलोमीटर दूर तक वार कर सकती है। दो स्टेज वाली यह मिसाइल दस टन वजन की है और इसमें ठोस ईंधन भरा होता है।

नौसेना में शामिल हो चुकी है अरिहंत पनडुब्बी

इस परीक्षण से यह भी सिद्ध हुआ है कि अरिहंत पनडुब्बी भारतीय नौसेना में सफलता पूर्वक शामिल हो चुकी है। अरिहंत पनडुब्बी में 12 बैलिस्टिक मिसाइलें तैनात की जा सकती हैं। इसके अलावा इसमें छह टारपीडो भी तैनात किये जा सकते हैं।

यहां रक्षा सूत्रों ने इन रिपोर्टों की पुष्टि की है और कहा है कि परमाणु बिजली से चालित अरिहंत परमाणु पनडुब्बी अब सही मायने में भारत की त्रिस्तरीय परमाणु क्षमता ( ट्रायड) से लैस कही जा सकती है। बी- 05 कोड नाम वाली इस बैलिस्टिक मिसाइल के विकास पर करीब दो दशकों से अत्यंत गोपनीय काम चल रहा था।

सागर में कहीं से भी जवाबी हमला करने की स्थिति में रहेगी अरिहंत

अब इस मिसाइल से लैस होने के बाद अरिहंत पनडुब्बी बीच सागर में कहीं से भी सेकंड स्ट्राइक यानी जवाबी हमला करने की स्थिति में रहेगी। भारत ने सेकंड स्ट्राइक करने की अपनी अवधारणा विकसित की है जिसमें कहा गया है कि भारत कभी भी किसी देश पर पहला परमाणु हमला करने वाला देश नहीं बनेगा लेकिन यदि भारत पर कोई परमाणु हमला हुआ तो भारत भी अपनी ओर से जवाबी हमला करने के लिये तैयार रहेगा। इसके लिये भारत ने न्युक्लियर ट्रायड यानी जमीन, समुद्र या आसमान से दुश्मन के इलाके में परमाणु बम गिराने की क्षमता भारत के पास होगी। न्युक्लियर ट्रायड का यह तीसरा खम्भा तैयार नहीं था। अब अरिहंत परमाणु पनडुब्बी से बी-05 नाम की Submarine Launched Ballistic Missile छोड़ने की कामयाबी के बाद अरिहंत परमाणु पनडुब्बी को सही मायने में दुश्मन पर करारा हमला करने वाली पनडुब्बी के तौर पर मान्यता मिलेगी।

तीन बैलिस्टिक मिसाइलों के तीन राउंड दागे

अरिहंत पनडुब्बी से यूजर ट्रायल किया गया था जिसके पहले चरण के दौरान तीन बैलिस्टिक मिसाइलों के तीन राउंड दागे गए। इसके तहत दो परीक्षण 11 अगस्त को किये गए और तीसरा परीक्षण 12 अगस्त को किया गया। इसके लिये अऱिहंत पनडुब्बी को विशाखापत्तनम नौसैनिक गोदी से दस किलोमीटर दूर समुद्र सतह के 20 मीटर भीतर तैनात किया गया था। मिसाइल छूटने के बाद अपने लक्ष्य पर सटीक गिरी जिसे जीरो सर्कुलर एरर प्रोबेबिलीटी कहा जाता है।

बी-05 एसएलबीएम का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है।

 

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