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स्पेशल रिपोर्ट: सुदूर महासागर में शांति कायम करने की नई भूमिका में नौसेना

भारतीय नौसेना 
भारतीय नौसेना (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। यहां मंगलवार 8 मई से शुरू हो रहे नौसेना के छमाही कमांडर सम्मेलन में सुदूर महासागरों में खास मिशन के लिये भारतीय युद्धपोतों की तैनाती की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इसका उद्देश्य भारत के निकट सागरीय इलाके में शांति व स्थिरता को सुनिश्चित करना है।





हिंद महासागर में चीनी नौसेना की बढ़ती मौजूदगी को बेअसर करना और समुद्री डाकुओं द्वारा व्यापारिक समुद्री पोतों में दहशत फैलाने से रोकना इसका मुख्य इरादा है। जब से हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक हलचल में इजाफा हुआ है भारतीय नौसेना इसकी काट के लिये मिशन बेस्ड डिप्लायलमेंट फिलासफी पर काम कर रही।

इस नई समुद्री रणनीति के जरिये यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हिंद महासागर में दूसरी नौसेनाएं  भारतीय व्यापारिक मार्गों को अवरुद्ध होने से रोकने में सक्षम हो सकें। महासागर में शांति व स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सागर’ यानी ‘सेक्युरिटी एंड ग्रोथ फार आल इन द रीजन’ की अवधारणा पेश की थी जिसे अमल में लाने पर नौसेना के कमांडर गहन मंथन करेंगे। सागर के तहत यह उद्देश्य तय किया गया है कि भारतीय नौसेना महासागरों में स्थायी तौर पर मौजूद रहे और शांतिपूर्ण लेकिन जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता हासिल कर सके।

पिछले वर्षों में नौसेना का ध्यान इस बात को लेकर केन्द्रित रहा है कि किस तरह नौसेना की लड़ाकू क्षमता को बढ़ाया जा सके और इसे हमेशा युद्ध के लिये चौकस रखा जा सके। इसके लिये नौसेना अपने 131 युद्धपोतों और पनडुब्बियों के बेड़े को हमेशा चुस्त-दुरुस्त रखने की कोशिश कर रही है। युद्धपोतों को किस तरह मेनटेनेंस के बाद समाघात भूमिका में जल्द से जल्द भेजा सके इस पर गहन मंथन किया जाएगा। इसके अलावा नौसेना की यूनिटों में ट्रैनिंग मानकों की समीक्षा की जा रही है जिसके लिये शिप आपरेटिंग स्टैंडर्ड्स(शाप्स) को नये सिरे से विकसित किया जाएगा। इसके तहत वास्तविक युद्ध माहौल बना कर खास पृष्ठभूमि में ट्रैनिंग मानक तैयार करने का काम चल रहा है।

उल्लेखनीय है कि तीनों सेनाओं में नौसेना ही ऐसी है जिसने अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल में बढ़त हासिल की है। कमांडर सम्मेलन के दौरान नौसेना की दांत व पूंछ का अनुपात यानी लड़ाकू और उनके सहायक सैनिकों का अनुपात अधिक संतुलित करने के प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा।

यहां नौसैनिक अधिकारियों ने बताया कि नौसेना के लिये देश में ही इन दिनों 27 युद्धपोत और पनडुब्बियों का निर्माण चल रहा है। नौसेना ने 2015 में ही भारतीय नौसेना स्वदेशीकरण योजना शुरु की थी। 2030 तक चलने वाली इस योजना के तहत 15 वर्षों का अधिग्रहण कार्यक्रम बनाया जा रहा है।

रक्षा बजट में नौसेना को जो धन आवंटित हुआ है उसके समुचित इस्तेमाल पर भी कमांडर सम्मेलन में विचार किया जाएगा। 11 मई तक चलने वाले कमांडर सम्मेलन को आठ मई को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण सम्बोधित करेंगी। इस दौरान रक्षा मंत्रालय के आला अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

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