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स्पेशल रिपोर्ट: मोदी और एबे के साझा बयान ने दिया चीन को संदेश

नई दिल्ली। भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों की टोक्यो  में सोमवार को हुई दि्वपक्षीय वार्ता के बाद जारी साझा बयान चीन के लिये कई संदेशे देने वाला है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और प्रधानमंत्री शिंजो एबे द्वारा जो साझा विजन स्टेटमेंट जारी किया गया है उसमें चीन का नाम नहीं लिया गया है लेकिन चीन की ओर इशारा साफ है।





टोक्यो  में हुई सालाना शिखर वार्ता के बाद विजन स्टेटमेंट में हिंद प्रशांत महासागरों के लिये एक साझा विजन जारी होना काफी अहम है।गौरतलब है कि चीन पर यह आरोप लगाया जाता है कि दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के इलाके में चीन कृत्रिम द्वीप बना रहा है और तटीय देशों के  समुद्री इलाके वाले द्वीपों पर अपना अधिकार जता कर  उन्हें अपने कब्जे में लेने की धमकी देता है।

इसके मद्देनजर  भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों द्वारा यह साझा बयान जारी करना अहम है औऱ चीन के लिये यह संदेश है कि चीन के आक्रामक रवैये का भारत और जापान मिल कर और तीसरे देशों के साथ सहयोग कर मुकाबला करेंगे। साझा बयान में चीन का नाम लिये बिना सीधा कहा गया है कि  हिंद प्रशांत इलाके में नियम आधारित व्यवस्था लागू होनी चाहिये। यह   नियम आधारित व्यवस्था देशों की सार्वैभौमिकता और प्रादेशिक अखंडता का आदर करे  और सागरों में पोतों की आवाजाही की आजादी का सम्मान करे। सागरों के ऊपर से होने वाली उड़ानों पर कोई रोक-टोक नहीं हो और उन पर किसी तरह की लगाम नहीं लगे और  कानूनी तौर पर चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर किसी तरह की रोकटोक नहीं हो। यह अंतरराषट्रीय कानून के मान्यता प्राप्त सिद्धांतों का आदर करे । साझा बयान में पहले की तरह फिर दोहराया गया है कि  सागरों में संयुक्त रा्ष्ट्र कानून का  पालन किया जाए और इस इलाके में सैन्य कार्रवाई या ऐसी कोई धमकी नहीं दी जाए।

भारत और जापान के बीच सागरीय सुरक्षा सहयोग काफी गहरा होते जाने के मद्देनजर दोनों प्रधानमत्रियों ने कहा कि  भारतीय नौसेना और जापानी समुद्री आतम रक्षा बल द्वारा आपसी सहयोग बढाने के फैसले का वे  स्वागत करते हैं। दोनों  देशों के बीच  सैन्य सहयोग बढ़ाने वाला समझौता एक्वीजशन एंड क्रास सर्विसेज अग्रीमेंट (ए सी एस ए ) पर बातचीत का शुरू होना काफी अहम है। दोनों देशों ने यूएस-२  एम्फीबियस विमान के लिए कुछ सालों से चल रही बातचीत को जारी रखने का फिर जिक्र किया है। दोनों ने कहा कि रक्षा साज-सामान और तकनीक के  विकास में सहयोग की भारी गुंजाइश है।

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