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Special Report: चीन का मुकाबला करने के लिये भारत-जापान की जुगलबंदी

पीएम मोदी और जापान के पीएम

नई दिल्ली।  सड़क, रेल और समुद्री सम्पर्क बनाने वाली चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआई) को चुनौती देने के लिये जापान और भारत की जुगलबंदी दक्षिण एशिया में ढाचांगत क्षेत्र का कायाकल्प करेगी। दोनों देश मिलकर भारत के पडो़सी देशों में कनेक्टीविटी बढाने के लिये ढांचागत निर्माण में  साझा परियोजनाओं पर काम करेंगे।





भारत और जापान ने वादा किया है कि इन देशों में ये परियोजनाएं पारदर्शी तरीके से बनेंगी और किसी पक्ष को बाहर रख कर लागू नहीं की जाएंगी। गौरतलब है कि चीन पर यह आरोप लगाया जाता है कि  चीन अपनी बीआरआई के जरिये दूसरे देशों को कर्ज के जाल में फंसा रहा है। लेकिन भारत और जापान कर्ज के भुगतान के लिये एक जि्म्मेदार मॉडल अपनाएंगे।

भारत बनाएगा सड़क, जापान बनाएगा पुल

यहां रीजनल कनेक्टीविटी पर आयोजित एक सम्मेलन में जापान के राजदूत केंजी हीरामात्सु ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि बांग्लादेश में भारत सडकें बनाएगा और उन्हें जोड़ने के लिये जापान पुल बनाएगा। वहां जापान रेलवे ब्रिज बनाएगा जबकि भारत उस पर दौड़ने वाली ट्रेनें मुहैया कराएगा।

श्रीलंका में भारत और जापान मिल कर एलएनजी से जुड़े ढांचागत प्रोजेक्टों पर काम करेंगे। इसके अलावा म्यांमार के रखीन प्रांत में जापान औऱ भारत मिलकर भवन, स्कूल औऱ बिजली की परियोजनाएं लागू करेगें।

दोनों देश अफ्रीका की विकास जरूरतों को भी करेंगे पूरा

राजदूत हीरामात्सु ने कहा कि कनेक्टीविटी केवल ढांचागत प्रोजेक्ट पर ही आधारित नहीं होगी। इसके लिये लोगों को आपस में जोड़ने का काम होना चाहिये। इसीलिये भारत-जापान कनेक्टीविटी प्रोजेक्ट अफ्रीका की विकास जरूरतों को भी पूरा करेंगे। उन्होंने कहा कि यह महज संयोग नहीं है कि जापान के मुक्त औऱ खुले हिंद प्रशांत नजरिया को अफ्रीका में ही पेश किया गया था। मिसाल के तौर पर केन्या में जापान और भारत कैंसर के इलाज के लिये एक अस्पताल खोलेंगे बल्कि लघु और मझोले उद्योगों के विकास में भी सहयोग करेंगे। इसके अलावा अफ्रीका में बिजनेस कोरिडोर का विकास करने के लिये दोनों देश भारत-जापान बिजनेस प्लैटफार्म स्थापित करेंगे। इससे अफ्रीका में बिजनेस के विस्तार में मदद मिलेगी।

राजदूत ने कहा कि न केवल दिवपक्षीय बल्कि त्रिपक्षीय आधार पर भी कनेक्टीविटी के प्रोजेक्टों पर काम किये जाएंगे। भारत और जापान अमेरिका के साथ मिलकर बेहतर कनेक्टीविटी के प्रोजेक्टों पर काम करेंगे और जल्द ही इस बारे में ठोस प्रस्ताव लाए जाएंगे।

तनाव के बदले व्यापार बने समृद्धि का मंत्र

अमेरिकी प्रशासन के सहयोग से कट्स इंटरनैशनल और फिक्की दवारा आयोजित सम्मेलन में विदेश सचिव विजय गोखले ने कहा कि दक्षिण एशिया की समृद्धि के लिये तनाव के बदले व्यापार को मंत्र बनाया जाना चाहिये। गोखले ने कहा कि जैसे-जैसे विश्व शक्ति संतुलन पूर्व की ओर खिसक रहा है  दक्षिण एशिया और हिंद प्रशांत इलाके में भारत की केन्द्रीय भूमिका को सभी स्वीकर करने लगे हैं।

विदेश सचिव गोखले ने कहा कि भारत का हमेशा से यह रवैया रहा है कि एक स्थायी साझेदारी बनाने के इऱादे से हिंद प्रशांत इलाके में अपनी भूमिका निभाए। भारत चाहेगा कि यह एक नियम आधारित व्यवस्था के तहत विकसित हो। विदेश सचिव ने कहा कि दक्षिण एशिया में भौतिक कनेक्टीविटी, ज्ञान कनेक्टीविटी और जनता के बीच कनेक्टीविटी पर भारत जोर देता रहा है।

 

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